कुमार मधुकरचंडीगढ़, 7 जनवरी 2026: AAP-कांग्रेस गठबंधन टूटने के बाद अब चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी को बड़ा झटका लगने वाला है। गठबंधन टूटने के ऐलान के महज कुछ घंटों के बाद ही AAP में भगदड़ मच गई है। विश्वसनीय सूत्रों के अनुसार, AAP के 3 से 5 पार्षद कांग्रेस में शामिल होने की तैयारी कर रहे हैं, जबकि 2 पार्षद भारतीय जनता पार्टी (BJP) का दामन थामने को बेताब हैं,इसमें से एक पार्षद तो वो हैं जो कॉलोनी का दबंग नेता के रूप में जाने जाते हैं, जो AAP की कमजोर कड़ी साबित हो रहा है। इस प्रकार से भाजपा में पार्षदों की संख्या बढ़कर 20 से 21 तक हो सकती है, जबकि कांग्रेस में पार्षदों संख्या बढ़कर 8 से 11 तो हो सकती है, बशर्ते कि कांग्रेस इन पार्षदों को हरी झंडी तुरंत दिखा दें।इस भगदड़ के केंद्र में हैं AAP के चंडीगढ़ प्रभारी जनरल सिंह। पार्टी आलाकमान द्वारा चंडीगढ़ संभालने का जिम्मा सौंपे गए जनरल सिंह की कार्यक्षमता पर ही सवाल उठ गया है। पार्टी सूत्रों के अनुसार प्रभारी साहब अपने को प्रभारी कम और विधाता ज्यादा समझने लगे थे। सूत्रों का कहना है कि पिछले तीन साल से ये साहब कहां चल गए थे, किसी को कोई अता पता ही नहीं था। इसी प्रभारी ने ही चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी संगठन का भी ऐसा भट्ठा बिठाया कि अब इस पार्टी का कोई नाम लेने वाला कोई रहेगा पता नहीं। नाम न छापने के शर्त पर कुछ पार्षदों का कहना था कि जरनैल सिंह को पार्टी से निष्कासित किया जाए या फिर सभी तरह की जिम्मेदारी को छीन लिया जाए। सूत्र का यह भी कहना है कि जनरल सिंह की नाकामी ही है कि भाजपा गए पार्षदों को मनाने की कोशिश की, लेकिन किसी ने नहीं सुनीं।
अब हालत यह है कि AAP के महज 3-4 पार्षद ही पार्टी में बचे रहने की संभावना है। पार्षदों के पलायन से AAP का चंडीगढ़ में सफाया तय है क्योंकि कांग्रेस की ओर जाने की तैयारी कर चुके 3-5 पार्षद गठबंधन टूटने से नाराज हैं। साथ ही उन्होंने कांग्रेस के साथ पुराने रिश्तों को मजबूत करने का मन बना चुके हैं। वहीं आप के 2 पार्षद BJP में जाने को तैयार हैं , इनमें से एक दबंग नेता जो कॉलोनी से हैं यह भी BJP के टिकट पर आने वाले चुनावों में दांव खेलने को तैयार बैठे हैं। उसकी लोकप्रियता स्थानीय मुद्दों पर BJP के पक्ष में काम आएगी।
जनरल सिंह पर दबाव: कई पार्षदों का कहना है कि यदि पार्टी को मजबूत बनाने की सोच है तो AAP के चंडीगढ़ प्रभारी जनरल सिंह से सारी जिम्मेदारी हाईकमान वापिस लें। क्योंकि पार्षदों की बगावत ने उनकी साख पर सवाल खड़े कर दिए हैं। AAP के इस संकट ने चंडीगढ़ की राजनीति को गरमा दिया है। कुल 35 पार्षदों वाली AAP के लिए यह पलायन वोट बैंक पर सीधा प्रहार है। आने वाले दिनों में और बड़े उलटफेर की संभावना से इंकार नहीं किया जा सकता। क्या जनरल सिंह संभाल पाएंगे मोर्चा, या AAP का चंडीगढ़ से पत्ता साफ हो जाएगा? राजनीतिक गलियारों में यही चर्चा का विषय बना हुआ है।
अब कोई माई का लाल भाजपा को मेयर बनाने से नहीं रोक सकता!
AAP-कांग्रेस गठबंधन टूटा, अब कोई BJP को मेयर बनाने से नहीं रोक सकता। AAP-कांग्रेस गठबंधन टूटने के बाद चंडीगढ़ म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन में BJP का मेयर पद पक्का है। अब कोई भी BJP को मेयर बनने से नहीं रोक सकता। राजनीतिक समीक्षक मानते हैं, BJP का कब्जा तय।
























