Kumar Madhukar
चंडीगढ़: नगर निगम के करीब 300 करोड़ रुपये से जुड़े 31 जुलाई को पास किए गए करीब 16 टेबल एजेंडों को वापिस लेने का फैसला किया गया है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा के सख्त रुख के बाद मेयर सौरभ जोशी ने साफ कर दिया है कि बिना चर्चा के पास किए गए इन एजेंडों को दोबारा पूरी जानकारी के साथ सदन की होने वाली अगली जनरल हाउस की बैठक में लाया जाएगा। इन पर सदन में विस्तृत चर्चा के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा।
वहीं मेयर सौरभ जोशी के मुताबिक 31 जुलाई 2026 की जनरल हाउस बैठक में जिन टेबल एजेंडों को पर्याप्त चर्चा के बिना पास किया गया था, उन्हें लेकर भाजपा कार्यालय कमलम में प्रदेश अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा की अध्यक्षता में बैठक हुई। बैठक में पूर्व प्रदेश अध्यक्ष संजय टंडन और अरुण सूद, प्रदेश महामंत्री संगठन श्रीनिवासुलु, प्रदेश महामंत्री रणबीर भट्टी, पूर्व मेयर सुभाष चावला और भाजपा के सभी पार्षद मौजूद रहे।
मेयर ने कहा कि प्रदेश अध्यक्ष और भाजपा पार्षदों की बैठक के साथ-साथ भाजपा चंडीगढ़ के कोर ग्रुप में भी सर्वसम्मति से यह फैसला लिया गया था कि 31 जुलाई को बिना चर्चा के पास किए गए टेबल एजेंडों को मान्य नहीं माना जाएगा। इसकी जानकारी नगर निगम आयुक्त को भी दी गई थी।
सवाल यह भी 31 जुलाई को एजेंडे पास कैसे हुए?
इस पूरे घटनाक्रम ने मेयर की कार्यप्रणाली पर भी सवाल खड़े किए हैं। आरोप है कि करीब 300 करोड़ रुपये से जुड़े इन महत्वपूर्ण एजेंडों को सदन में लाने से पहले मेयर ने न तो अपने ही भाजपा पार्षदों के साथ पर्याप्त सलाह-मशविरा किया और न ही स्थानीय पार्टी नेतृत्व से इस पर कोई चर्चा की। यही वजह है कि अब भाजपा संगठन के सख्त हस्तक्षेप के बाद इन एजेंडों को दोबारा सदन में लाने की स्थिति बनी है।
मेयर ने यह भी कहा कि 31 जुलाई के टेबल एजेंडों को अभी भी जनरल हाउस की कार्यवाही में पास दिखाया जाना बेहद आपत्तिजनक है। उनका कहना है कि सभी एजेंडों को पूरी जानकारी के साथ दोबारा सदन के सामने रखा जाएगा। ताकि पार्षदों को उन पर खुलकर चर्चा करने का मौका मिले और जरूरत होने पर ही उन्हें मंजूरी दी जाए।
सौरभ जोशी ने स्पष्ट किया कि भाजपा विकास कार्यों या इन एजेंडों के खिलाफ नहीं है। भाजपा केवल उस प्रक्रिया का विरोध कर रही है, जिसके तहत बिना चर्चा के इन्हें पास किया गया।
अगली सदन की बैठक में होगी अग्निपरीक्षा
अब निगाहें नगर निगम जनरल हाउस की अगली बैठक पर होगी। करीब 300 करोड़ रुपये से जुड़े ये एजेंडे दोबारा चर्चा के लिए सदन में लाए जा सकते हैं। ऐसे में यह बैठक सिर्फ विकास कार्यों की मंजूरी तक सीमित नहीं रहेगी, बल्कि यह भी तय करेगी कि भाजपा पार्षद इस मुद्दे पर संगठन के फैसले के साथ किस हद तक एकजुट रहते हैं।
मल्होत्रा की सख्ती के बाद संधू पर कारण बताओ नोटिस, भाजपा में अनुशासन का संदेश
इससे पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष जेपी मल्होत्रा की सख्ती के बाद चंडीगढ़ ने वार्ड नंबर 14 के पार्षद कुलजीत सिंह संधू के खिलाफ भी कार्रवाई शुरू कर दी है। प्रदेश महामंत्री रणबीर भट्टी की ओर से 17 अगस्त 2026 को जारी कारण बताओ नोटिस में संधू पर पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सोशल मीडिया और प्रेस में बयान देने तथा पार्टी विरोधी गतिविधियों में शामिल होने का आरोप लगाया गया है।
संधू को नोटिस मिलने के तीन दिनों के भीतर प्रदेश अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा के समक्ष लिखित स्पष्टीकरण देने को कहा गया है। जवाब नहीं देने या स्पष्टीकरण संतोषजनक नहीं पाए जाने की स्थिति में उनके खिलाफ अनुशासनात्मक या संगठनात्मक कार्रवाई की चेतावनी दी गई है।
एक तरफ मेयर का फैसला, दूसरी तरफ संगठन का अनुशासन
इन दोनों घटनाओं को एक साथ देखें तो चंडीगढ़ भाजपा में संगठन बनाम व्यक्तिगत राजनीतिक रुख का संदेश साफ दिखाई देता है। एक तरफ प्रदेश अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा ने 31 जुलाई के टेबल एजेंडों पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्हें दोबारा सदन में चर्चा के लिए लाने की दिशा तय की, तो दूसरी तरफ पार्टी नेतृत्व के खिलाफ सार्वजनिक बयानबाजी पर पार्षद कुलजीत सिंह संधू को कारण बताओ नोटिस जारी कर यह संदेश दिया गया है कि पार्टी लाइन से अलग जाने पर संगठन कार्रवाई करने से पीछे नहीं हटेगा।
अब असली परीक्षा होने वाली अगली बैठक में होगी—क्या करीब 300 करोड़ के ये एजेंडे दोबारा विस्तृत चर्चा के बाद पास होंगे, और क्या भाजपा के सभी पार्षद संगठन के फैसले के साथ एकजुट नजर आएंगे? ध्यान यह भी रहे कि 20 अगस्त की हो रही बैठक में ये एजेंडे नहीं आएंगे।























