CHD नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार को पंजाब वापिस जाना ही होगा! हाई कोर्ट की अनुमति के बगैर कमिश्नर बनाकर चंडीगढ़ भेजे गए थे Part-6

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पंजाब चीफ सेक्रेटरी को अवमानना का नोटिस जारी, पंजाब में पंचायती जमीनों में हुए गबन का मामला!
कुमार मधुकर
चंडीगढ़। चंडीगढ़ नगर निगम कमिश्नर अमित कुमार को लेकर हाईकोर्ट ने पंजाब के मुख्य सचिव को अवमानना नोटिस जारी किया है। हाईकोर्ट ने कमिश्नर अमित कुमार आईएएस को अनधिकृत तौर पर पंजाब से चंडीगढ़ कमिश्नर के तौर पर डेपुटेशन किए जाने  को लेकर गंभीर नाराज़गी जताई है। पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट ने पंजाब सरकार के तत्कालीन और वर्तमान दोनों मुख्य सचिवों को अवमानना नोटिस जारी किया है।
यह कार्रवाई आईएएस अधिकारी अमित कुमार के चंडीगढ़ तबादले को लेकर की गई है, जो कोर्ट की अनुमति के बिना किया गया बताया जा रहा है। अमित कुमार, 2008 बैच के आईएएस अधिकारी हैं, जिन्हें पंजाब में पंचायती जमीनों में हुए गबन की जांच के लिए कोर्ट आदेशों पर कमिश्नर-सह-अपील प्राधिकारी नियुक्त किया गया था। वे विशेष रूप से मोहाली के उन गांवों की जांच संभाल रहे थे, जो चंडीगढ़ की सीमा से सटे हैं। हालांकि, 14 अक्टूबर 2024 को उन्हें बिना अदालत की पूर्व अनुमति के केंद्र सरकार के डेपुटेशन पर चंडीगढ़ भेज दिया गया, जहां अमित कुमार वर्तमान में नगर निगम चंडीगढ़ के कमिश्नर के रूप में कार्यरत हैं।
मुख्य न्यायाधीश शील नागू और न्यायमूर्ति सुमित गोयल की खंडपीठ के समक्ष गुरुवार को जब यह मामला सुना गया, तब पंजाब सरकार के वकील ने यह स्वीकार किया कि यह तबादला कोर्ट या अमीकस क्यूरी की पूर्व स्वीकृति के बिना किया गया था। यह तबादला 10 मई 2018 के प्रतिबंधात्मक अंतरिम आदेश के बावजूद हुआ। अदालत ने कहा, “तब के और वर्तमान पंजाब के मुख्य सचिवों को नोटिस जारी किया जाता है कि वे बताएं क्यों न उनके खिलाफ 10 मई 2018 के अंतरिम आदेश के उल्लंघन पर अवमानना कार्रवाई शुरू की जाए।”

कोर्ट ने यह भी निर्देश दिया कि वे अगली सुनवाई तिथि से पहले जवाब दाखिल करें।अब यह मामला अगली सुनवाई हेतु 11 मार्च को सूचीबद्ध किया गया है। साथ ही न्यायालय ने केंद्र सरकार को भी पक्षकार बनाते हुए पूरे केस की पेपर बुक अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल सत्यपाल जैन के कार्यालय को सौंपने का आदेश दिया है। यह मामला कुलदीप सिंह नामक व्यक्ति द्वारा दायर याचिका से संबंधित है, जिसमें चंडीगढ़ से सटे गांवों की शामलात जमीनों के कथित दुरुपयोग और हेराफेरी की जांच की मांग की गई है।

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