सावधान चंडीगढ़, आपको एक बार फिर ब्लैक आउट का सामना करना पड़ेगा ! छह फेडरेशनों की आपातकालीन बैठक में बड़ा फैसला 

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संजीव शर्मा 
चंडीगढ़  (26.02.2022) आज चंडीगढ़ प्रशासन एवं एम सी से जुड़े विभिन्न विभागों के संयुक्त कर्मचारी मोर्चा की छह फेडरेशनों की आपातकालीन बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा शहर के बिजली कर्मचारियों की हड़ताल खत्म होने पर किए गए समझौते के द्वारा की जा रही रंजिशन कार्रवाइयों पर चर्चा हुई  और प्रशासन की इस दोगले व्यवहार की निंदा व आलोचना की गई। संयुक्त कर्मचारी मोर्चा की छह प्रमुख फेडरेशन में फेडरेशन ऑफ यूटी एवं एम सी इम्प्लाइज, चंडीगढ़ यूटी सबोर्डिनेट सर्विस फेडरेशन, यूटी एस एस फेडरेशन, ज्वाइंट एक्शन कमेटी यूटी एवं एम सी, चंडीगढ़ सबोर्डिनेट सर्विस यूटी तथा आल कांट्रेक्चुअल कर्मचारी संघ यूटी चंडीगढ़ इत्यादि शामिल हैं। छह फेडरेशनों में चंडीगढ़ के विभिन्न विभागों जैसे हॉर्टिकल्चर,रोड, ट्रांसपोर्ट,वाटर सप्लाई, बिल्डिंग एंड मेंटिनेंस,म्युनिसिपल कारपोरेशन,अस्पताल,एम ओ एच, चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड, एजुकेशन,हायर एजुकेशन,बिजली विभाग, पीजीआई व यूनिवर्सिटी इत्यादि की विभिन्न युनियनें जुड़ी हुई हैं ।
`संयुक्त कर्मचारी मोर्चा की बैठक में चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा बिजली कर्मचारियों पर की जा रही कार्रवाई न रुकने पर संयुक्त कर्मचारी मोर्चा से जुड़ी सभी यूनियनों द्वारा जल्द ही रोष मार्च व सामूहिक गिरफ्तारी की घोषणा भी की गई। संयुक्त कर्मचारी मोर्चा ने चंडीगढ़ प्रशासन से मीटिंग की मांग भी की। चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा बिजली कर्मचारियों की 22 फरवरी से 24 फरवरी की तीन दिवसीय हड़ताल के कारण बिजली आपूर्ति की निगरानी कर रहे दो जुनियर इंजीनियर को अगली जांच तक के लिए निलंबित कर दिया गया है जबकि पावर यूनियन की हड़ताल के बाद बिजली आपूर्ति बहाल करने में सेना अधिकारियों से सहयोग नहीं मिलने पर अधीक्षण अभियंता (विद्युत) को कारण बताओ भी नोटिस जारी किया गया है इसके अलावा विद्युत विभाग के 126 नियमित कर्मचारियों को सरकारी कार्यों से अनुपस्थित रहने के कारण गंभीर स्थिति के लिए कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है तथा विद्युत विभाग के 17 आउटसोर्स कर्मचारियों की सेवा समाप्ति एवं 143 कर्मचारियों के विरूद्ध प्राथमिकी दर्ज करने के क्रम में भी जांच जारी है।

चंडीगढ़ प्रशासन ने स्वास्थ्य सचिव यशपाल गर्ग अध्यक्षता में गठित कमेटी जिसमें चिकित्सा अधीक्षक 16, चिकित्सा अधीक्षक 32 और गुरप्रीत सिंह एक्सईएन (विद्युत) शामिल है। चंडीगढ़ प्रशासन से हुए समझौते के बाद बिजली कर्मचारियों ने सप्लाई चालू कर दी थी तथा सभी कर्मचारियों को ड्यूटी ज्वाइन करवाई गई परन्तु चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा कर्मचारियों पर की जा रही इस अनुशासनात्मक कारवाई से कर्मचारी संगठनों में रोष व्याप्त है। संयुक्त कर्मचारी मोर्चा ने बयान किया कि इस कारवाई से चंडीगढ़ प्रशासन द्वारा कर्मचारियों में डर का माहौल व बेचैनी पैदा करने की कोशिश की जा रही है ताकि भविष्य में कर्मचारी संगठनों पर अपनी मांगों के प्रति रोष प्रदर्शन करने पर रोक लगाई जा सके। बैठक में शहर में धारा 144 व एस्मा लगाने का भी विरोध किया गया। आज की बैठक में संयुक्त कर्मचारी मोर्चा की कैबिनेट में राजिंदर कुमार, सुखबीर सिंह,अश्विनी कुमार,बलविंदर सिंह, रघुबीर चंद,धर्मेन्द्र सिंह राही, रंजीत मिश्रा, राजेन्द्र कटोच,बिपिन शेर सिंह,हरकेश चंद, राजिंदर कुमार व गोपाल दत्त जोशी इत्यादि की आपसी सहमति से यह निर्णय लिया गया।

भड़काहट वाली कार्यवाही तुरन्त वापिस लेने की अपील

हड़ताल के दौरान बारिश, तेज हवाओं व डयूटी पर तैनान लोगों द्वारा  गलत आपरेशन के कारण बाधित हुई बिजली को हड़ताल पर होते हुए भी यूनियन द्वारा कर्मचारियों को अपील करने तथा सम्बन्धित कर्मचारियों द्वारा तुरन्त प्रभाव से बिजली चलाने के लिए कर्मचारियों को प्रोत्साहन देने की बजाय उनके खिलाफ दुर्भावना व द्ववेशपूर्ण तौर पर शोकाज जारी करना तथा एफ आई आर दर्ज करना उन्हें डराने व हतोत्साहित करने वाला कदम है वह भी जब सौहार्दपूर्ण माहौल में बातचीत होने तथा प्रशासन द्वारा निजीकरण व कर्मचारियों की सेवा शर्तो तथा संशोधित वेतनमान जारी करने व पिछले एक साल से जानबूझकर रोकी गई प्रमोशन करने को बहाल करने के विश्वास देने तथा 2 मार्च से लगातार अन्य मांगों पर बातचीत का दौर शुरू करने के ऐलान के बाद हड़ताल 11/2 दिन पहले ही वापिस ले लिया। यूनियन के पदाधिकारियों ने प्रशासन को सौहार्दपूर्ण माहौल में हुई बातचीत को जारी रखने की अपील करते हुए कहा दमनकारी कदम के तौर पर उठाये गये निलम्बन, शोकाज व एफआई आर तुरन्त रद्द किये जायें। बिजली कर्मचारी जरूरत के मुताबिक आधे से भी कम गिनती में होने के बावजूद 14-16 घंटे काम कर बिजली चला रहे हैं तथा एक कर्मचारी 3-3 कर्मचारियों का काम कर रहे हैं। अब उनकी छुटृी भी बन्द की जा रही है अगर बिजली कर्मचाी सरकार के नियमों के अनुसार काम करते हैं तो प्रशासन को जितने कर्मचारी हैं उतने कर्मचारी और रखने पडेंगे। इस बात को विचारने की जरूरत है लेकिन प्रशासन, सस्पेंशन शोकाज व केस दर्ज पर अघोषित हड़ताल वाली हालात पैदा कर रहा है जो किसी भी तरह जनता के हित में नहीं होगी।

यूनियन ने 8 जनवरी से लगातार रैलियां प्रर्दशन कर 11 जनवरी को रैली कर एसडीएम को ज्ञापन दिया। उसके बाद 24 जनवरी तथा 1  फरवरी को पुन: उपायुक्त के मार्फत ज्ञापन दिया तथा सरकार द्वारा कोई संज्ञान न लेने पर 4 फरवरी को पुनः  22 फरवरी से 72 घंटे की हड़ताल का नोटिस देना पड़ा। प्रशासन ने अपना इन्तजाम करने की भी बात की। हैल्प लाइन नम्बर भी दिया व विभाग के अधिकारियों व अन्य विभागों के राज्यों के कर्मचारियों व अधिकारियों को तैनात किया जो अपनी डयूटी व जिम्मेवारी नहीं निभा पायें जिसका ठीकरा कर्मचारियों पर फोड़ा जा रहा है जो ठीक नहीं है।

यूनियन ने चण्डीगढ़ की जनता व सभी जनता के प्रतिनिधियों को अपील की है कि निजीकरण के खिलाफ लड़ाई को व कर्मचारी हितों को ध्यान में रखकर प्रशासन द्वारा दमनकारी कदम उठाने के खिलाफ अपनी आवाज उठायें। इसी बीच देश के 27 लाख बिजली कर्मचारियों व अभियन्ताओं की सर्वोच्च संस्था – राष्ट्रीय तालमेल कमेटी बिजली कर्मचारी व अभियन्ता ने अपनी मीटिंग कर चण्डीगढ़ के हालातों का संज्ञान लिया है व माननीय राज्यपाल पंजाब व चण्डीगढ़ प्रशासक श्री बनवारी लाल पुरोहित को ज्ञापन देकर जनहित में प्रशासन द्वारा उठाये जा रहे दमनात्मक कार्यवाही रोकने की मांग की है।

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