भाजपा में भूचाल! सतिंदर सिंह का बुरा हश्र, पूर्वांचलियों को माना अछूत! कई छोड़ देंगे पार्टी

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File Photo
भाजपा प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के नामों की घोषणा
चंडीगढ़ 11 मार्च 2020। भारतीय जनता पार्टी की ओर से प्रदेश स्तर के पदाधिकारियों के नामों की घोषणा कर दी गई। इसमें प्रदेश उपाध्यक्षों के लिए छह, महामंत्रियों के तीन, सचिवों के छह, कोषाध्यक्षों के दो, कार्यालय सचिवों के तीन, प्रवक्ताओं के लिए छह के अलावा कई अन्य पदों के लिए पदाधिकारियों के नामों की घोषणा बुधवार को कर दी गई। इसमें बड़ी हैरानी की बात है कि प्रदेश अध्यक्ष की रेस में रह चुके सरदार सतिंदर सिंह को किसी भी पद के लायक नहीं समझा गया है, जबकि प्रधानी की रेस में रह चुके चंद्र शेखर को महामंत्री, धरिंदर तायल को प्रवक्ता और राज किशोर को कोषाध्यक्ष बनाया गया है। भाजपा प्रदेश पदाधिकारियों की जारी सूची में पूर्व MAYOR देवेश मोदगिल का भी नाम कहीं भी नहीं है। वहीं शहर के नामी आर्किटेक्ट सुरिंदर बाहगा को पार्टी में उपाध्यक्ष बनाया गया है। दूसरी तरफ शिप्रा बंसल को भी पार्टी का प्रवक्ता बनाया गया है।
सतिंदर का हाल धवन वाला! 
वहीं सूत्रों का कहना है कि सरदार सतिंदर सिंह का हाल पूर्व केंद्रीय मंत्री हरमोहन धवन का हाले होने वाला है। क्योंकि सतिंदर सिंह को लोकसभा चुनाव में प्रभारी बनाया गया था। बताया जाता है कि सिंह की रणनीति और मोदी प्रभाव के कारण ही किरण खेर चुनाव जीतीं हैं। अन्यथा किसी भी सूरत में किरण खेर का चंडीगढ़ से दोबारा जीतना संभव नहीं था। यहां बताना जरूरी है कि सतिंदर सिंह कुछ साल पहले भी प्रधानी के रेस में आए थे, तो उनको आतंकवादी तक करार देकर इस पद से दूर रखा गया था। इस बार भी जब प्रधानी की दौड़ शुरू हुई तो सतिंदर सिंह रेस में थे, लेकिन बाहर कर दिए गए थे।
पार्टी ने पूर्वांचलियों को माना अछूत! 

वहीं दूसरी ओर पदों की सूची में पूर्वांचलियों को भी जगह नहीं मिली है। पूर्वाचलियों में पार्षद अनिल दुबे को कद्दावर नेता माना जाता है। क्योंकि जब भी पार्टी को भीड़ जुटाने की जरूरत पड़ती है तो भाजपाई अनिल दुबे के अलावा पप्पू शुक्ला, दिलीप शर्मा के अलावा अन्य पूर्वांचली नेताओं के शरण में जाकर गिड़गिड़ते हैं। ताकि पार्टी की इज्जत बच सके। अब जब लोकसभा चुनाव भाजपा जीत गई है तो पद देने में पार्टी ने अछूत की तरह व्यवहार किया है। ध्यान रहे कि शहर में पूर्वांचलियों की लाखों की संख्या में है। यहां यह भी बताना जरूरी है कि अनिल दुबे ने भी अरूण सूद को अध्यक्ष बनाने की शिफारिश की थी। इसके बाद भीदुबे को भी अछूत माना गया।

पूर्वांचली नेता भाजपा छोड़ देंगे!
पार्टी प्रधान अरुण सूद की इस दोगली नीति को लेकर वीरवार को पूर्वांचली नेताओं की मीटिंग होगी और अनिल दुबे जैसे कई पूर्वांचली नेता भाजपा छोड़ देंगे।

ये है पदाधिकारियों के नाम
पार्टी प्रदेश उपाध्यक्ष के लिए आशा जसपाल, प्रेम कौशिक, स. सुरिंदर बाघा, राम लाल बैरवा, नीना तिवारी और सुनीता भट्ट का नाम शमिल है। वहीं प्रदेश महामंत्री के लिए दिनेश कुमार(संगठन),चन्दर शेखर, रामबीर भट्टी। प्रदेश सचिव के लिए अमित राणा, डॉ. हुकम चंद, अनूप गुप्ता, जसविंदर कौर,  अनु मक्क्ड़, स.तेजिंदर सिंह। कोषाध्यक्ष के लिए राज किशोर और अमित जिंदल। कार्यालय सचिव के लिए गजिंदर शर्मा, देवी सिंह और दीपक मल्होत्रा। मोर्चा समन्वयक बी. सी. पूरी। प्रकोष्ठ समन्वयक हरीश गर्ग। पार्टी प्रवक्ता के लिए धरिन्द्र तायल, कैलाश जैन, गुरप्रीत सिंह ढिल्लो, नरेश अरोरा, गौरव गोयल और शिप्रा बंसल। मोर्चा अध्यक्ष के लिए महिला मोर्चा सुनीता धवन, भारतीय जनता युवा मोर्चा विजय सिंह राणा, अनुसूचित जाति मोर्चा के लिए कृष्ण कुमार, ओबीसी मोर्चा एन आर मेहरा और  किसान मोर्चा के लिए सरदार दीदार सिंह हेलोमाजरा का नाम शामिल है।

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