कॉग्रेस अध्यक्ष छाबड़ा ने चंडीगढ़ प्रशासन की कार्यशैली पर भी उठाया सवाल, पूछा संजय टंडन का एजेंडा!

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प्रदीप छाबड़ा ने सांसद किरण खेर व संजय टंडन को आड़े हाथों लेते हुए कहा
राज सिंह

चंडीगढ़ 27 अप्रैल 2020। कांग्रेस प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा ने संजय टंडन व किरण खेर को आड़े हाथों लेते हुए कहा कि आज कोरोना वायरस से शहर की जनता त्रस्त हो गई है। वहीं सांसद किरण खेर, जिसे आज जनता बीच में होना चाहिए उसका शहर में कोई अता पता नहीं है। प्रदीप छाबड़ा ने यूटी प्रशासन की कार्यशैली पर भी सवाल खड़ा करते हुए पूछा कि प्रशासन संजय टण्डन के साथ किस हैसियत से मीटिंगे कर रहा है, क्योंकि टंडन ना तो सांसद है और ना अध्यक्ष छाबड़ा ने कहा कि कोरोना वायरस के प्रकोप में जहां कांग्रेस प्रशासन के हर सही फैसले के साथ खड़ी है, पर प्रशासन ऐसे समय मे संजय टण्डन के कौन से राजनीतिक एजेंडे को पूरा कर रहा है,यह समझ से परे है।

एडवाइजर मनोज परिदा के साथ भाजपा कार्यकर्ता संजय टंडन मीटिंग करते (फाइल फोटो, बाएं में टंडन)

उन्होंने कहा कि अभी तक बीजेपी के कार्यकर्ता ही नही समझ पाए के अभी भी संजय टंडन अध्यक्ष है या अरुण सूद, या सूद सिर्फ कागजों में ही अध्यक्ष है या प्रेस नोट तक ही उनकी जिम्मेदारी है। कांग्रेस का फैसला है कि केन्द्र हो या चंडीगढ़ सरकार व प्रशासन के हर सही फैसले के हम साथ है लेकिन प्रशासन तजुर्बेकार पूर्व सांसदों व विपक्ष की राय व सुझाव लेने के बदले राजनीतिक फायदे लेने वालों को साथ लेकर मीटिंगे कर रहा है जो निंदनीय है।

कांग्रेस अध्यक्ष के अनुसार प्रशासन के अफसरों को संजय टण्डन की बजाए जनता की चुनी व जवाबदेही सांसद किरण खेर से मीटिंग कर रणनीति बनानी चाहिए थी, वहां बिना हैसियत के संजय टण्डन को क्या किरण खेर ने ऑथोराइज़ किया है? जिस सांसद किरण खेर को हर कदम में आगे आकर अपनी नैतिक जिम्मेदारी को निभाते हुए जनता के साथ कंधे से कंधा मिला कर चलना चाहिए था, लेकिन एक महीना गायब रहने के जब जनता गुमशुदा मेडम को सवाल उठाने लगी तो मेडम ने जनता के बीच जाने के बजाए मीडिया का रास्ता चुना ओर उसमें भी जनता को आ रही विभिन्न परेशानियों को दूर करने की रणनीति व प्लान रखने के बजाए लोगों के सवालों से घबराई अपनी टिस निकालते हुए बेतुके बयानबाजी करती नजर आई।

अगर उम्रदराज गवर्नर साहब, सलाहकार, डीसी व अन्य अधिकारी वार रूम बना रोज मीटिंगे कर सकते है तो किरण खेर उसमें क्यों नही शामिल हो सकती है, अपनी राय क्यों नही रख सकती है। लोकसभा चुनाव में रोज सोशल मीडिया में अपने राजनीतिक बयान देने वाली सांसद एक महीना उसमें भी गायब रही है ना बता पाई की वाक्य में वो शहर में थी या मुंबई थी। वो कहती है कि उन्हें एस्कोर्ट करके दिल्ली से लाया गया, सवाल तो यहां भी उठता है कि उन्हें किस कैटागिरी में ये सहूलियत मिली? आज जहाँ लॉक डाउन से काम धंधे बंद है, लोंगो के कमाई के साधन बिल्कुल बंद हो चुके है लोगों के खाने के लाले पड़े हुए है।

क्या सांसद मेडम को बिजली पानी के बिल व टेक्स माफ की आवाज नही उठानी चाहिए थी। क्या आज स्कूल के बच्चों की फीस माफ की आवाज नहीं उठानी चाहिये थी, सभी राशन कार्ड ब बिना राशन कार्ड धारकों मध्यम वर्ग को राशन मिलने व राशन लेने में कॉलोनी निवासीयों का आ रही भारी दिक्कत किरण खेर को क्या   दिखाई नही दे रही है? डोर टू डोर राशन बांटने की बजाए धुप में लोगों को राशन बांटने व लंबी कतार बना जिस से कालोनियों में कोरोना वायरस फैलने का डर ओर क्या मेडम ने प्रशासन को आड़े हाथों लिया? आज यूनिवर्सिटी के छात्रों के हॉस्टलों को आइसोलेशन वार्ड बना छात्रों की जिंदगी को दांव पर लगाने वाले फैसले से क्या वो सहमत है? कांग्रेस जनता की आवाज बनकर हर उन मुद्दों को उठती रहेगी जो अंधी ओर बेहरी सरकार को नही दिख रही है।

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