कांग्रेस पार्टी की फजीहत कराने में कहीं पवन बंसल का हाथ तो नहीं ?

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सभी फाइल फोटो

राज सिंह

चंडीगढ़ 10 OCT 2020। पिछले दिनों सेक्टर-35 स्थित राजीव गांधी भवन में चंडीगढ़ के नव नियुक्त प्रभारी हरीश रावत के सामने ही कांग्रेस पार्टी की जिस प्रकार से फजीहत हुई। इसको लेकर आज भी शहर की राजनीतिक गलियारों में जबरदस्त चर्चा चल रही है। चर्चा में यह सवाल खडा किया जा रहा है कि क्या कांग्रेस भवन में जो कुछ भी हुआ, इसकी स्क्रिप्ट पहले से तैयार थी। इससे भी गर्म चर्चा यह है कि कांग्रेस पार्टी की फजीहत कहीं पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन कुमार बंसल के इशारे पर तो नहीं की गई?चर्चा के अनुसार गत वीरवार को यूटी कांग्रेस के मुख्यालय में जो घटा, वह अप्रत्याशित नहीं था, क्योंकि उसके लिए चंडीगढ़ के शीर्ष नेता ने ही ताना-बाना बुना था। पंजाब-चंडीगढ़ कांग्रेस के प्रभारी बनकर पहली बार चंडीगढ़ कांग्रेस कार्यालय पहुंचे पूर्व केंद्रीय मंत्री हरीश रावत का स्वागत समारोह कांग्रेस का फजीहत समारोह इसी शीर्ष नेता की सरपरस्ती में बन गया। चंडीगढ़ शहर के कुछ नेताओं ने तो स्थानीय नेताओं पर हमला करते हुए केंद्रीय नेतृत्व तक को नहीं बख्शा था। आंतरिक बैठकों में होने वाली बातें सार्वजनिक मंच से बोलकर पहले ही अस्तित्व की लड़ाई लड़ रही पार्टी को कमजोर करने और विरोधियों को हथियार देने जैसी हो गईं।

गौरतलब है कि केंद्रीय नेतृत्व ने पिछले महीने संगठन में बदलाव करके हरीश रावत को यहां का प्रभारी लगाया था। प्रभारी लगने के बाद वीरवार को उनके स्वागत का कार्यक्रम यूटी कांग्रेस ने राजीव गांधी भवन सेक्टर-35 में आयोजित किया था। इस कार्यक्रम का जो फ्लो चार्ट बना था, उसमें सिर्फ हरीश रावत और शहर के पूर्व सांसद पवन बंसल का स्वागत किया जाना था। बंसल को भी केंद्रीय कार्यालय में प्रशासनिक विभाग का प्रभारी बनाया गया है। प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा को इसमें स्वागत भाषण देने के बाद दोनों नेताओं को शाल देकर स्वागत करना था। अचानक ही एक शीर्ष नेता ने शहर के कुछ नेताओं को बोलने देने का निर्देश दिया और फिर तमाशा हो गया।

नेता पवन शर्मा ने तो प्रदेश अध्यक्ष पर हमला बोलते-बोलते केंद्रीय नेतृत्व को ही कटघरे में खड़ा कर दिया। उन्होंने हरीश रावत और पवन बंसल को नसीहत दी कि केंद्रीय नेतृत्व कमजोर है, उसे सुधारें। यही बोलकर भाजपा सदैव कांग्रेस हाईकमान पर निशाना साधती रहती है। पार्षद दविंदर सिंह बबला और पूर्व पार्षद हरमोहिंदर सिंह लक्की ने प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा पर निशाना साधते हुए संगठन की खामियों को सार्वजनिक किया। उन्होंने कहा कि पार्टी की दुर्दशा कमजोर संगठन के कारण हुई है। पूर्व मेयर चावला ने भी संगठन के हालात गंभीर बताते हुए इसको मजबूत करने की बात कही। महिला कांग्रेस अध्यक्ष दीपा दुबे ने कहा कि पार्टी भले ही सीट हारी हो मगर उसका जनाधार बढ़ा है, जो चुनाव नतीजे देखने से सामने आ जाता है। जरूरत संगठन में सबके साथ मिलकर संघर्ष करने की है न कि आंतरिक कलह की।

स्वागत कार्यक्रम के दौरान जिन नेताओं ने सवाल उठाये, उन्होंने आयोजन में कोई सहयोग भी नहीं दिया। जब एक के बाद एक नेता आते और पार्टी की फजीहत करते, तब केंद्रीय नेता खामोश तमाशाई बने रहे। सभी को पता था कि यह पार्टी की आंतरिक बैठक नहीं है और यहां मीडिया से लेकर तमाम कार्यकर्ता मौजूद हैं, जो यह हाल देखकर क्या संदेश पाएंगे। इसी दौरान निजी खुन्नस के चलते पूर्व सांसद पवन बंसल ने सबके सामने ही प्रदेश अध्यक्ष प्रदीप छाबड़ा के हाथों शाल न लेकर सार्वजनिक रूप से यह जता दिया कि पार्टी में सब ठीक नहीं है और वह छाबड़ा को पसंद नहीं करते।

यूटी कांग्रेस प्रभारी के सामने हुई इस घटना पर पूरे शहर में चर्चा रही। भाजपा और आम आदमी पार्टी के नेताओं ने तो साफ कहा कि कांग्रेस में न तो कभी अनुशासन था और न जनहित के लिए वक्त। यह आपस में ही लड़ते और सियासत करते रह जाते हैं। इस दल के नेता सिर्फ अपने फायदे और कुर्सी की सोचते हैं।

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