आयो रे भाई, चंडीगढ़ में एमसी चुनाव का मौसम! भाजपा ने फिर छोड़ा चुनावी सुर्रा

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राज सिंह
चंडीगढ। तो सावधान! नहीं हैं, तो हो जाइए। चंडीगढ की एमपी का भले ही कोई अता-पता नहीं है, लेकिन शहर की भाजपा अब जाग गई है। क्योंकि चंडीगढ़ में इस साल के अंत में नगर निगम का चुनाव जो होने वाला है। पिछले करीब सात साल में दो बार लोकसभा चुनाव हुए। इसमें कई वादे किए गए जैसे सीएचबी के करीब 60 हजार मकानों में किए गए बदलाव को नियमित कराना, सरकारी नौकरी दिलाने, शहर को स्मार्ट बनाना, शहर में विकास की गति में तेजी लाने और भी कई वादे किए गए थे। फिलहाल सब कुछ हवा-हवाई हो चुकी है, देश में चंडीगढ़ शहर की क्या स्थिति है, किसी से छिपी नहीं है। वहीं शहर की सांसद कहां और किस हालत में है, जनता को पिछले एक साल से पता ही नहीं है। अब जब एमसी चुनाव इस साल दिसंबर में होने वाला है तो भाजपा एक बार फिर जाग गई है। कुल मिलाकर भाजपा ने एक बार से
चुनावी सुर्रा छोड़ दिया है। भाजपा ने दावा किया है कि प्रशासक वीपी सिंह बदनौर को सुझाव दिया है कि एक एक समस्या का ऐसे समाधान किया जाए। पूरी खबर को जरूर पढें, क्योंकि भाजपा जाग गई है। पहले एमसी हाउस में पानी के रेट बढ़ाए गए और अब रेट कम करने के सुझाव दे रही हैं।
चंडीगढ कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता एचएस लक्की ने कहा कि भाजपा ने सात साल में हुए दो लोकसभा चुनावों में शहर की जनता को भ्रमित किया, जिसका खामियाजा शहर की जनता को भुगतने को मजबूर है। अब जब इस साल दिसंबर में एमसी चुनाव होने वाला है तो भाजपा ने फिर से जनता में भ्रम फैलाने के लिए चुनावी सुर्रा छोड़ दिया है, लेकिन जनता सबकुछ जानती है।
    भारतीय जनता पार्टी चंडीगढ़  “प्रेस विज्ञप्ति”
चंडीगढ़ 27 मार्च, 2021 : चंडीगढ़ के सभी वर्गों, शहरी और गाँवों के लोगों की मांगों और समस्याओं को पुरजोर ढंग से चंडीगढ़ के प्रशासक के समक्ष रखने और उनके स्थायी हल को लेकर भारतीय जनता पार्टी चंडीगढ़ का शीर्ष नेतृत्व का प्रतिनिधिमंडल पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद के नेतृत्व में प्रशासक और पंजाब के राज्यपाल वी पी बदनोर से मिला। प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ के सभी वर्गों की सभी मांगों पर गहन अध्यन करके एक एक करके उनपर न केवल चर्चा की बल्कि प्रशासक के सामने उनके हल को लेकर सुझाव भी पेश किये। प्रतिनिधिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष सूद के साथ पार्टी के वरिष्ठ नेता और हिमाचल प्रदेश के सह प्रभारी संजय टंडन, प्रदेश संगठन महामंत्री दिनेश कुमार, प्रदेश महामंत्री रामबीर भट्टी, महापौर रविकांत शर्मा भी शामिल थे।
स भेंटवार्ता की विस्तृत जानकारी प्रदान करते हुए पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद ने कहा कि प्रतिनिधिमंडल की प्रशासक के साथ चंडीगढ़ के विभिन्न पहलुओं पर एक एक करके क्रमवार चर्चा हुई और मांग की गयी कि इन समस्याओं को अतिशीघ्र हल करवाया जाये।

पानी के बिल : प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासक को अवगत कराया कि चंडीगढ़ नगर निगम द्वारा बढ़ाये गए पानी के रेट से लोगों को राहत प्रदान करने के लिए सदन द्वारा संशोधित प्रस्ताव  को पारित किया जा चुका है। चूँकि प्रशासन द्वारा बढ़े हुए रेट को लेकर सितम्बर माह में अधिसूचना जारी की जा चुकी है और सदन द्वारा पारित संशोधित प्रस्ताव की सिफारिशों के अनुसार इसमें बदलाव की आवश्यकता है। इसलिए सदन द्वारा पारित संशोधन प्रस्ताव  के अनुसार ही अधिसूचना में परिवर्तन किया जाये।
संशोधित प्रस्ताव  के अनुसार जब तक कोरोना खंड चल रहा है तब तक पुरानी दरों पर ही पानी के बिल देने की सिफारिश की गयी है और उसके उपरान्त ही इन दरो को एकदम से न बढ़ा कर मामूली बढत के साथ धीरे धीरे बढाने की बात कही गयी है ताकि नगर निगम के वितीय घाटे को भी कम किया जा सके और चंडीगढ़ की जनता पर भी एकदम से आर्थिक बोझ न पड़े।

हाउसिंग बोर्ड मकान समस्या : प्रतिनिधिमंडल ने चंडीगढ़ में हाउसिंग बोर्ड द्वारा निर्मित मकानों के निवासियों की समस्या के स्थायी हल को लेकर भी प्रशासक से बात की और सिफारिश की कि दिल्ली में जिस प्रकार से नीड बेस चेंज को लेकर सरकार द्वारा लोगों को राहत प्रदान की गयी है ठीक उसी प्रकार से चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड के मकानों में रह रहे लोगों को भी राहत प्रदान की जाये और जल्द ही इस समस्या को हल करने हेतु उच्च स्तरीय कमेटी के प्रतिनिधियों को बोर्ड के अधिकारीयों के साथ बैठा करवाई जाये ताकि इस समस्या को हल करने के लिए दिल्ली तर्ज पर रोडमैप तैयार कर लोगों को राहत प्रदान की जा सके। गौरतलब है कि दिल्ली में तत्कालीन मुख्यमंत्री और भाजपा के वरिष्ठ नेता वी के मल्होत्रा की सरकार ने लोगों को राहत प्रदान करने की नीति बनाई थी जिसको लागू किया गया।
कोआपरेटिव हाउसिंग सोसाइटी : इस श्रेणी के लोगों की समस्याओं को रखते हुए प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासक को बताया कि लोगों के मकानों को लीज होल्ड टू फ्री होल्ड करने के लिए नीति बनायीं जाये। साथ ही उन्होंने कहा कि हाल ही में हाउसिंग सोसाइटीज के लोगों को पहले पानी के डबल डोमेस्टिक चार्ज देना पड़ रहा था परन्तु नगर निगम के माध्यम से अब वर्तमान में लोग मीटर रीडिंग के आधार पर घरेलु चार्ज देंगे ऐसा प्रावधान करवा दिया गया है। इसको लेकर प्रशासक ने भी संतुष्टि जतायी |

गाँवों के विकास का फंड  : उधर गाँवों के लोगों की समस्याओं को प्रशासक के समक्ष रखते हुए प्रतिनिधिमंडल ने आग्रह किया कि चंडीगढ़ के सभी गाँवों को नगर निगम में शामिल किया जा चुका है इसलिए चंडीगढ़ शहर की तर्ज पर गाँवों के विकास के लिए सड़कों के निर्माण, सीवरेज, भवन निर्माण, पानी की लाइन, स्ट्रीट लाइट, सामुदायिक केंद्र,पार्क आदि के लिए नगर निगम को अतिरिक्त ग्रांट की आवश्यकता है। भाजपा प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद ने सिफारिश की कि इन उपरोक्त विकास के कामों को युद्ध स्तर पर अगले माह से शुरू करवाया जाना चाहिए और इसके लिए निगम को 102 (90+12) करोड़ रुपये की ग्रांट दी जानी है, जिसको जारी किया जाये ताकि विकास के कामों को शुरू किया जा सके। प्रशासक ने मौके पर ही निगम महापौर रविकांत शर्मा को इन कामों के लिए चालू वित् वर्ष 2020-21 के अंतर्गत 50 करोड़ की राशि जारी करने के दस्तावेजों को सौंपा ताकि इन कार्यों को तुरंत प्रभाव से शुरू किया जा सके। इसके लिए प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासक का आभार व्यक्त किया। प्रशासक ने आश्वासन दिया कि आगामी वित्त वर्ष 2021-22 के अंतर्गत शेष राशि भी जारी की जाएगी ताकि गाँवों के विकास में कोई कमी न आये।

कोलेक्टरल रेट बढौतरी : चंडीगढ़ के गाँवों की जमीन के कोलेक्ट्रल रेट साथ सटे पडौसी राज्यों की जमीनों से काफी कम हैं। इस से गांववासियों को जमीन के मुआवजे के काफी कम रेट मिल पाते हैं। प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि चंडीगढ़ के सभी गाँव जब नगर निगम में शामिल किये जा चुके हैं तो ऐसे में शहरी तर्ज उनकी जमीन के कोलेक्टरल रेट को बढाया जाये और चंडीगढ़ के उपायुक्त को इसके लिए तुरंत दिशानिर्देश प्रदान किये जाये।

लाल डोरा : प्रतिनिधिमण्डल ने चंडीगढ़ के गाँवों के भीतर लाल डोरे को समाप्त करने की सिफारिश करते हुए कहा कि गाँवों के लोगों की अधिकतर जमीन को तो प्रशासन द्वारा अधिगृहित किया जा चुका है। गांववासियों के पास सीमित जमीन ही बची है और उस जमीन पर भी लाल डोरे की तलवार उन पर लटकी रहती है। साथ ही चेंज ऑफ़ लैंड यूज़ और नियमितीकरण की नीति को लागू किया जाये। इतना ही नहीं इन नीतियों के रखरखाव और इस से सम्बंधित कार्यों को करने हेतु एक उच्च स्तरीय कमेटी का भी गठन किया जाये। इस कमेटी में जनता के प्रतिनिधियों को भी रखा जाये साथ ही ये कमेटी इस बात की भी निगरानी रखे कि लाल डोरे के बाहर बने निर्माणों के नियमतिकरण के लिए लगने वाली फीस को भारी भरकम न रखा जाये और जो भी पैसा आये वो सारा पैसा नगर निगम के पास ही आना चाहिए, क्योंकि गाँवों को भी अब नगर निगम में शामिल किया जा चुका है।

स्ट्रीट और रोडसाइड वेंडर्स : वेंडर्स की तमाम समस्याओं को रखते हुए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि वेंडर्स एक्ट का प्रावधान उनकी आजीविका की सुरक्षा के लिए किया गया था ताकि गरीब लोगों को रोजगार के अवसर प्रदान किये जाएँ। इस एक्ट के माध्यम से वेंडर्स के भीतर काफी रोष व्याप्त है। इतना ही नहीं उन लोगों को जहाँ जगह दी वहां मूलभूत सुविधायों का आभाव हैं। प्रशासक ने भी इस बात को माना कि वाकई वेंडर्स को स्थायी रोजगार के लिए और अधिक अध्यन करने की आवश्यकता है। इसके लिए प्रतिनिधिमंडल ने सिफारिश की कि मेयर द्वारा अफसरों और पार्षदों को लेकर गठित वेंडर्स कमेटी को अध्यन करने दिया जाए कि इन लोगों के स्थायी रोजगार को दिलवाने हेतु बड़े पार्कों के बाहर, मार्किट में जहाँ से इन लोगों को उठाया गया था यदि वहां कोई संवेधानिक आपति न हो पुनः वहीँ बैठाया जाये, आदि आदि को लेकर सर्वे किया जाये ताकि वर्तमान में उनको जो परेशानियों को झेलना पड़ रहा है उस से उनको राहत प्रदान की जाये और दोबारा सर्वेक्षण किया जाये।

उल्लेखनीय है कि निगम द्वारा गठित टाउन वेंडिंग कमेटी में एक भी सदस्य जनता का जन प्रतिनिधि नहीं है | जिस वजह से वेंडर्स की सुविधाओं की अनदेखी हुई | प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि निगम की इस कमेटी में कम से कम निगम के 6 पार्षदों को भी इस कमेटी में शामिल किया जाये और इसका चेयरमैन महापौर को बनाया जाये। इतना ही नहीं प्रतिनिधिमंडल ने मांग की कि जिस प्रकार से निगम में अन्य प्रकार की सब कमेटी गठित की गयी हैं ठीक उसी प्रकार से निगम में स्ट्रीट वेंडर्स कमेटी का गठन किया जाये। प्रशासक बदनोर ने अपनी सहमति देते हुए कहा कि वे जल्द ही इसका प्रारूप उनके पास भेजें और वे अतिशीघ्र ही इस कमेटी के गठन की सूचना जारी करेंगे।

उधोगपतियों की समस्या : इसी प्रकार से औधोगिक क्षेत्र में भी लीज होल्ड टू फ्री होल्ड की नीति को लागू किया जाये और केंद्र सरकार द्वारा जारी इंडस्ट्रियल पालिसी का लाभ फिलहाल एक कनाल या उस से भी अधिक के मालिकों को प्राप्त हो रहा है, ये लाभ सभी उद्योगपतियों को प्राप्त हो सके इसके लिए भी कोई ठोस नीति को लाना चाहिए।

शहरी रिहायशी प्लाट पालिसी : प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि शहरी रेजिडेंशियल प्रॉपर्टी के लिए प्रशासन द्वारा लीज होल्ड टू फ्री होल्ड की पालिसी के अंतर्गत लोग अपनी प्रॉपर्टी को परिवर्तित करवाने में हिचकिचा रहे हैं क्योंकि प्रशासन द्वारा तय कन्वर्जन फीस अधिक है । इस फीस को कम किया जाये ताकि लोग अपनी प्रॉपर्टी को इस पालिसी के तहत आगे आकर प्रॉपर्टी को कन्वर्ट करवा सके और प्रशासन को इस से और अधिक राजस्व भी प्राप्त होना शुरू हो सकेगा। शहर के कलेक्टर रेट को भी कम करने की बात प्रतिनिधिमंडल ने राखी।

अनुबंधित कर्मियों को नियमित : माननीय सुप्रीम कोर्ट में ऊमा देवी केस के न्यायिक फैसले का हवाला देते हुए प्रतिनिधिमंडल ने प्रशासक से आग्रह किया कि चंडीगढ़ के किसी भी विभाग,निगम, किसी भी श्रेणी, चाहे वो गेस्ट टीचर हो या अन्य, जिन लोगों को लगातार 10 वर्षों से भी ऊपर सर्विस करते हुए हो गए हैं, उनको नियमित किया जाये। प्रावधान के अनुसार एक बार अनुबंधित लोगों को नियमित कर सकता है। परन्तु अभी तक चंडीगढ़ प्रशासन ने कभी भी इस प्रावधान का प्रयोग नहीं किया हुआ है इसलिए वो जो लोग इतने वर्षों से चंडीगढ़ की सेवा करते आ रहे हैं उन लोगों को नियमित करके उनको राहत प्रदान करे।

पुनर्वास कॉलोनी मालिकाना हक : चंडीगढ़ शहर में पुनर्वास योजना के अंतर्गत पड़ने वाली 28 पुनर्वास कॉलोनियों के मालिकाना हक को लेकर काफी समय से मामला अटका हुआ है। प्रतिनिधिमंडल ने अवगत करवाया कि वर्ष 1990 में एक बार सिर्फ एक माह के लिए ही इन लोगों को मालिकाना हक दिलाने के लिए आवेदन करवाया गया था जो कि उसके बाद कभी भी नहीं हुआ। उस समय अधिकतर लोग इस से वंचित रह गए थे। शेष लोग भी अपने मकानों का मालिकाना हक प्राप्त कर सके इसके लिए भी ठोस नीति को लागू किया जाये ताकि पॉवर ऑफ़ ओट्रोनी पर खरीद करने वालों को अपने मकानों का मालिकाना हक प्राप्त हो सके।

उधर सेक्टर 37 और सेक्टर 38 में तीन कॉलोनी के बारे में बताते हुए प्रतिनिधिमंडल ने अपनी बात रखते हुए कहा कि काफी समय पूर्व नगर निगम के चतुर्थ श्रेणी के कर्मचारियों को सरकारी मकान अलाटमेंट का कोई प्रावधान नहीं था, ऐसे में इन लोगों को बसाने के लिए सरकार ने चीप हाउस को बनवा कर इन लोगों को मकान उपलब्ध करवाए थे। ये मकान पुनर्वास के लिए बनाये गए थे। क्योंकि पुनर्वास घरों के लये कई अन्य विकल्प हैं और वो अधिकतर खाली पड़े हैं और खंडर बनते जा रहे हैं। यहाँ तक कि कुछ नशेड़ियों ने तो वहां अड्डा बना राका है। इस प्रकार से दुरुपयोग और अनदेखी के विपरीत यदि इन चीप हाउस में रहने वाले लोगों को नौकरी के चलते उनको मालिकाना हक दे दिया जाये तो इस से तो एक राजस्व प्राप्त होगा दूसरा उन मकानों में रहने वाले लोग सुगमता से रह पाएंगे।

गौ रक्षा बोर्ड : केंद्र सरकार द्वारा गौ वंश के पतन को रोकने और उसको बढाने के भाव से, उसको लावारिस होने से बचाने को लेकर विभिन्न जगह पर गौ रक्षा बोर्ड की स्थापना की गयी है और वहां पर गौ के लिए तमाम प्रकार की सुविधाओं को दिया जा रहा है। गौ माता के लिए गौ उपकर को केवल इसी काम के लिए खर्च करने का प्रावधान केंद्र सरकार द्वारा किया जा रहा है। ऐसे में चंडीगढ़ में भी गौ रक्षा बोर्ड का गठन किया जाये ताकि गौ माता को लावारिस होने से बचाया जा सके और चंडीगढ़ को भी साफ़ सुथरा रखा जा सके।

ओबीसी और अनुसूचित जाति प्रमाण पत्र : भाजपा प्रदेश अध्यक्ष सूद ने बताया कि इस श्रेणी के लोगों की समस्याओं को लेकर इसी सप्ताह उन्होंने भाजपा के प्रतिनिधिमंडल को लेकर उपायुक्त चंडीगढ़ से भेंटवार्ता की थी और इसके लिए विस्तृत रूप से चर्चा की थी। उन्होंने प्रशासक से आग्रह किया कि उपायुक्त ने इस काम के लिए अध्यन की बात कही थी और इस काम को करने के लिए और तीव्रता लाने के लिए दिशानिर्देश प्रदान किये जाएँ ताकि अतिशीघ्र लोग प्रमाण पत्र बिना किसी असुविधा के प्राप्त कर सके।

सरकार द्वारा फसल खरीद के लिए पोर्टल  : प्रदेश अध्यक्ष अरुण सूद ने प्रशासक वी पी बदनोर को अवगत कराया कि गत सप्ताह उनके पास चंडीगढ़ के आढतियों व किसानो का एक प्रतिनिधिमंडल उनसे मिलने आया था और उन्होंने समस्या बताई कि केंद्र सरकार द्वारा जारी दिशानिर्देश अनुसार अब फसलों के खरीदिकरण के लिए सरकार के पोर्टल पर जमीन दस्तावेजों को उपलब्ध करवा कर न्यूनतम समर्थन मूल्य किसान के सीधे खातों में स्थानांतरित होगा। क्योंकि चंडीगढ़ के किसानों के लिए चंडीगढ़ प्रशासन के द्वारा कोई ऑनलाइन पोर्टल नहीं है ऐसे में उनके हस्तक्षेप से केंद्र सरकार ने फिलहाल खाद्य आपूर्ति विभाग के पोर्टल पर आढतियों को सुविधा मुहैया तो करवा दी है ताकि किसानों को फसल के मूल्य मिलने पर कोई दिक्कत न हो परन्तु साथ ही सुझाव दिया कि इस प्रकार की सुविधा के लिए प्रशासन का अपना पोर्टल भी तुरंत तैयार करवाया जाना चाहिए ताकि किसान वहां जाकर अपना पंजीकरण करवा सके।

बची पुनर्वास कॉलोनी सर्वेक्षण : प्रतिनिधिमंडल ने बताया कि वर्ष 2006 में पुनर्वास कॉलोनी में रहने वाले लोगों को घर मुहैया करवाने हेतु चंडीगढ़ प्रशासन ने बायोमेट्रिक सर्वेक्षण कराया और उस दौरान सीमा विवाद के चलते मोहाली और पंचकुला के साथ सटी कॉलोनियों के लोगों का सर्वेक्षण नहीं हो सका। वहां के लोग मकान लेने से वंचित रहे। ऐसे में उन्होंने प्रशासक से मांग की कि बची हुई कॉलोनियों का विशेष बायोमेट्रिक सर्वेक्षण करवाया जाये और उन लोगों को भी अन्य लोगों की तरह पुनर्वास योजना का लाभ प्रदान किया जाये।

घरो में नर्सिंग होम : चंडीगढ़ के घरों में बने नर्सिंग होम को मान्यता देने के प्रावधान के बारे में प्रतिनिधिमंडल ने सिफारिश करते हुए कहा कि चंडीगढ़ एडवाइजर कमेटी की हेल्थ समिति द्वारा भी इस मुद्दे को लेकर विशेष प्रकार के दिशानिर्देश के साथ नर्सिंग होम चालकों को भी राहत प्रदान करने की सिफारिश की गई हैं।  शिष्टमंडल ने कहा कि क्योंकि आपात जैसी परिस्थिति में सबसे जल्द मरीज को प्राथमिक सुविधा प्रदान हो सके, इसके लिए इन नर्सिंग होम के नियम आदि तय करके इनको चलने दिया जाये और उसमे अधिक बेहतरी के विकल्पों को तलाशा जाना चाहिए।

प्राइवेट स्कूल की मनमानी : प्रतिनिधिमंडल ने प्राइवेट स्कूलों के द्वारा मनमाने ढंग से विशेष वार्षिक फीस के प्रति कई अभिभावकों ने प्रदेश अध्यक्ष सूद से संपर्क साध कर उनको अवगत करवाया कि प्राइवेट स्कूल मनमाने ढंग से अभिभावकों को फीस जमा करवाने की बात कर रहे हैं जब कि अभी तक कोरोना चल रहा है और प्राइवेट स्कूल के मनमाने रेवैये पर अंकुश लगाने के लिए ठोस नीति को बनाया जाना चाहिए।

ऑटो मेकेनिकों की समस्या : उधर चंडीगढ़ की तमाम मोटर मार्किट के बरामदों में सामान रख कर काम करने वाले मकेनिकों की समस्या पर प्रकाश डालते हुए प्रतिनिधिमंडल ने कहा कि अस्थायी तौर पर बैठे ऐसे मकेनिकों का रोजगार भी चलता रहे, इनके लिए व्यापक विकल्प करके अलग स्थान पर इनको काम करने के लिए जगह मुहैया करवाई जाये।

प्रतिनिधिमंडल द्वारा उपरोक्त सभी मांगों और समस्याओं को सुनने के उपरान्त चंडीगढ़ के प्रशासक वी पी बदनोर ने आये हुए प्रतिनिधिमंडल को आश्वासन दिया कि चंडीगढ़ के लोगों की सभी प्रकार की समस्याओं को हल करवाने के वो सार्थक प्रयास करेंगे और सम्बंधित अधिकारीयों के लिए गहन अध्ययन के लिए दिशानिर्देश प्रदान करेंगे ताकि समय रहते इन समस्याओं को हल कर लोगों को लाभ दिया जा सके।

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