सत्यपाल जैन ने कहा: स्पीकरों से शक्तियां वापिस ली जाये 

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SANJIV SHARMA

चंडीगढ़ 28 जुलाई, 2020। चंडीगढ़ के पूर्व सांसद और भाजपा की राष्ट्रीय कार्यकारिणी समिति के सदस्य श्री सत्य पाल जैन ने कहा कि अब समय आ गया है, कि जब विधायकों को दल बदल विरोधी कानून के तहत अयोग्य ठहराने की शक्तियों को विधानसभा के स्पीकरों से वापिस ले लिये जाए तथा भारत निर्वाचन आयोग, न्यायाधिकरण या यहाँ तक कि उच्च न्यायालय या उच्चतम न्यायालय जैसे कुछ स्वतंत्र संस्थानों को दे दिया जाये। उन्होंने कहा कि एंटी डिफेक्शन लॉ के पिछले 35 वर्षों के अनुभव से पता चलता है कि विभिन्न राज्य विधानसभाओं के स्पीकर कानून के अनुसार मामलों को तय करने की न्यायिक उम्मीदों पर खरे नहीं उतर पाए हैं और इसलिए समय आ गया है ये शक्तियां उनसे वापिस ले ली जायें।

श्री जैन ‘‘भारत में संविधान-विरोधी दलबदल कानून’विषय पर “BEYOND LAW LCL” द्वारा आयोजित एक वेबिनार में बोल रहे थे। इस वेबिनार पर 3000 से अधिक लोगों ने भाग लिया और श्री जैन के विचारों को सुना।

श्री जैन ने कहा कि यद्यपि विभिन्न राज्य विधानसभाओं के स्पीकरों से उम्मीद थी कि वे न्यायिक न्यायाधिकरणों की तरह अयोग्य ठहराए जाने वाली याचिकाओं पर फैसला करेंगे, लेकिन अनुभव से पता चलता है कि विभिन्न स्पीकर उन पार्टी की इच्छाओं और निर्देशों के आधार पर गए हैं जिस पार्टी के टिकट पर वे चुन कर आये थे। उन्होंने कहा कि कुलदीप विश्नोई के मामले में हरियाणा के तत्कालीन अध्यक्ष ने हरियाणा के 6 जनहित कांग्रेस विधायकों में से 5 को कांग्रेस में शामिल करने की वैधता तय करने में लगभग 4 साल लगा गए थे, जिन्हें बाद में उच्च न्यायालय ने अयोग्य घोषित कर दिया था, लेकिन दूसरी ओर राजस्थान में अध्यक्ष ने सचिन पायलट और 19 अन्य विधायकों को 3 दिनों के भीतर अयोग्य ठहराए जाने की याचिका का जवाब देने के लिए कहा।

उन्होंने कहा कि दिलचस्प रूप से दोनों स्पीकरों की कार्रवाई का फायदा कांग्रेस पार्टी को मिला, जिनके टिकट पर वे विधानसभा के लिए चुने गए थे।

उन्होंने कहा कि दुर्भाग्य से अब स्पीकरों ने उस पार्टी की सदस्यता से औपचारिक रूप से इस्तीफा देना भी बंद कर दिया है, जिसके टिकट पर वे विधानसभा के लिए चुने गए हैं, बल्कि उनमें से कुछ अपने राजनीतिक दलों के दिन प्रतिदिन के कार्यों में भी भाग ले रहे हैं। ऐसी स्थिति में यह उम्मीद करना मुश्किल है कि स्पीकर न्यायाधीश की तरह अयोग्य याचिकाएं तय कर सकते हैं और इसलिए अब समय आ गया है कि वे एंटी डिफेक्शन कानून पर पुर्नविचार किया जाये तथा स्पीकरों से अयोग्य करने की शक्तियां वापस ले कर और किसी स्वतंत्र एजेंसी को दी जाये।

उन्होंने कहा कि अयोग्य ठहराए जाने वाली याचिकाओं को 4 से 6 महीने की अवधि में तय करने के लिए समयबद्ध किया जाना चाहिए, जैसा कि हाल ही में 2 मामलों में राज्य सभा के सभापति श्री एम वेंकैया नायडू ने किया था।

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