बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ आंदोलन में कूदा फाॅसवेक

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चंडीगढ 21 NOV 2020। बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ आंदोलन में अब फाॅस्वेक भी कूद गया है। शनिवार को प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर फाॅस्वेक के चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू ने साफ कर दिया कि निजीकरण के खिलाफ लडाई में अकेले पावरमैन कर्मचारी यूनियन नहीं है। अब इस लडाई में यूनियन के साथ शहर की जनता भी है। बिट्टू ने यह भी साफ कर दिया कि निजीकरण के खिलाफ लडाई को अंजाम तक पहुंचाएंगे। पत्रकारों के साथ बातचीत में फाॅस्वेक और पावरमैन यूनियन के कई पदाधिकारी मौजूद थे। आंदोलन की शुरूआत इसी माह से शुरू हो जाएगा।

फॉसवेक और यूटी पावरमैन यूनियन के पदाधिकारियों ने कहा कि लगातार अच्छी सेवा देने, सस्ती बिजली देने के बावजूद मुनाफा कमा रहे चण्डीगढ़ के बिजली विभाग का 100 प्रतिशत निजीकरण करने के लिए केन्द्र सरकार और स्थानीय प्रशासन की कड़ी निन्दा की। उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्यों से काफी सस्ती दरों में बिजली देने के बावजूद लगातार मुनाफा कमा रहे बिजली विभाग को 100 प्रतिषत निजी मुनाफाखोरों को कोडियों के दाम बेचा जा रहा है। अभी बिजली एक्ट 2003 में संशोधन के लिए बनाया बिजली बिल 2020 संसद में पेश भी नहीं हुआ। इससे पहले ही आत्मनिर्भर भारत के नाम पर पैकेज देेने के नाम पर केन्द्र शासित प्रदेशों के बिजली वितरण का निजीकरण का ऐलान कर सैकड़ों परिवारों को उजाड़ा जा रहा है।

यूनियन के नेता गोपाल दत्त जोशी और फाॅसवेक के चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू ने कहा कि सारे राज्यों व केन्द्रशासित प्रदेशों के वितरण का 100 प्रतिशत निजीकरण के लिए स्टैन्डरड बिडिग डाक्यूमेंट का ड्राफ्ट तैयार किया गया है, जिस पर अभी जनता के सुझाव भी नहीं लिये गये लेकिन जल्दीबाजी में कुछ खास वर्ग के लोगों के हितों को ध्यान में रखते हुए प्रशासन ने गैर संवैधानिक तौर पर मनमर्जी व हड़बड़ी में ट्रांसफर पॉलिसी बनाकर बिडिग प्रोसेस भी शुरू कर दिया, जिसके लिए जेईआरसी को भी दरकिनार कर दिया।

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