प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरूद्ध चुनाव याचिका खारिज

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इलाहाबाद 6 दिसम्बर, 2019. इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने आज प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विरूद्ध दायर उस चुनाव याचिका को खारिज कर दिया जो श्री तेज बहादुर ने पिछले लोक सभा चुनाव में श्री नरेन्द्र मोदी के वाराणसी संसदीय निर्वाचन क्षेत्र से उनके लोक सभा के लिये चुने जाने के विरूद्ध दायर की थी।

इलाहाबाद उच्च न्यायालय के न्यायधीश माननीय श्री मनोज कुमार गुप्ता ने, 23 अक्टूबर को श्री नरेन्द्र मोदी के वकील श्री सत्य पाल जैन एवं चुनाव याचिका कर्ता के वकील श्री शैलेन्द्र श्रीवास्तव की बहस सुनने के बाद अपना निर्णय सुरक्षित रखा था। उन्होंने आज अपना निर्णय सुनाते हुये इस चुनाव याचिका को विचारणीय न पाते हुये इसे प्राथमिक स्तर पर ही रद्द कर दिया।

श्री नरेन्द्र मोदी की तरफ से पेश होते हुये वरिष्ठ अधिवक्ता श्री सत्य पाल जैन ने इस चुनाव याचिका की वैद्यता को ही चुनौती देते हुये आपत्ति की थी कि लोक प्रधिनिधि कानून 1951 की धारा 82 के अनुसार किसी भी चुने हुये सांसद के विरूद्ध चुनाव याचिका या तो उस क्षेत्र का कोई मतदाता या फिर उस क्षेत्र के चुनाव का कोई उम्मीदवार ही दायर कर सकता है, अन्य कोई और व्यक्ति नहीं। उन्होंने कहा कि श्री तेज बहादुर ने स्वंय अपनी याचिका में माना है कि वे वाराणसी संसदीय क्षेत्र के मतदाता नहीं है। जहां तक उनके चुनाव में उम्मीदवार होने का प्रष्न है, वे इस चुनाव में उम्मीदवार नहीं थे क्योंकि उनका नामांकन पत्र अवैध होने के कारण चुनाव अधिकारी द्वारा रद्द कर दिया गया था। इसलिये क्योंकि वे चुनाव याचिकाकर्ता की दोनों श्रेणियों में नहीं आते, इसलिये उन द्वारा दायर चुनाव याचिका विचारणीय नहीं है। याचिकाकर्ता श्री तेज बहादुर के वकील वरिष्ठ अधिवक्ता श्री शैलेन्द्र श्रीवास्तव ने अपनी बहस में कहा था कि चुनाव अधिकारी ने श्री तेज बहादुर का नामांकन पत्र केवल इस आधार पर रद्द किया था कि उन्होंने अपने नामांकन पत्र के साथ चुनाव आयोग द्वारा जारी ऐसा कोई प्रमाण पत्र नहीं लगाया था कि सेना द्वारा उनको भ्रष्टाचार या देष द्रोह के कारण नौकरी से बर्खास्त नहीं कया गया। उन्होंने कहा था कि प्रार्थी द्वारा चुनाव आयोग से बार बार आग्रह करने पर भी ऐसा प्रमाण पत्र जारी नहीं किया गया तथा चुनाव अधिकारी ने भी प्रार्थी को ऐसा प्रमाण पत्र चुनाव आयोग से लाकर उन्हें दिखाने के लिये पर्याप्त अवसर नहीं दिये।

आज खुली अदालत में अपना निर्णय सुनाते हुये माननीय न्यायधीश ने अपने निर्णय में कहा कि यह याचिका विचार योग्य नहीं है तथा प्रार्थी को यह चुनाव याचिका दाखिल करने का कोई अधिकार नहीं है क्योंकि वह लोक प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 82 की दोनों योग्याताओं की परिधि में नहीं आते। माननीय अदालत इसलिये इस चुनाव याचिका को आगे सुनवाई के लिये जारी रखने की बजाये, इस प्रारम्भिका स्तर पर ही खारिज करती है।

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