नारी शक्ति जागरण समिति ने मनाया अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस

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चण्डीगढ़,8 March 2020, नारी शक्ति जागरण समिति चण्ड़ीगढ द्वारा भगवान परशुराम भवन सेक्टर 37 सी में अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के उपलक्ष्य में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में शहर की 250 महिलायें सम्मिलित हुई। कार्यक्रम में श्रीमति अनु गुप्ता जी (अध्यापक) ने उपस्थित महिलाओं को योगा एवं प्राणायाम के टिप्स दिए और बताया कि किस प्रकार हम योगा ओर प्राणायाम को नियमित कर के स्वस्थ रह सकते हैं। इसके उपरांत डॉक्टर रुचिका जी ने महिलाओं को स्वास्थ्य के संबंध में जागरूक किया। 
इसी कार्यक्रम में दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान से निमंत्रित श्री आशुतोष महाराज जी की शिष्या साध्वी राजवंत भारती जी ने भी कुछ विचार दिये। जिसमें उन्होने कहा कि आज बेशक हम आधुनिकता की तरफ बढ़ रहे हैं पर आज भी कहीं ना कहीं हमारी मानसिकता स्त्री और पुरूष को एक समान नहीं मानती। इसीलिए तो आज कन्या भ्रूण हत्या, दहेज प्रथा, घरेलू हिंसा जैसी बुराईयां हमारे समाज में हैं। उन्होंने कहा कि हर चीज के दो पहलु होते हैं। जैसे नदी के दो किनारे होते हैं जिनकी मर्यादा में रहकर वह अपने लक्ष्य सागर तक पहुँच जाती है। एक पक्षी जब दोनों पंखों के सहारे उड़ता है तो अकाश की उँचाईयों को छु लेता है। इसी प्रकार समाज में जब स्त्री और पुरूष दोनों का दर्जा बराबर होगा तभी समाज उन्नति कर पायेगा अन्यथा नहीं। पिता यदि घर से बाहर बच्चों के लिये कमाने जाता है तो, स्त्री घर के भीतर बच्चों को संस्कारों से पोषित करती है। हमारे भारत वर्ष में ऐसी कितनी ही आर्य मातायें हुई हैं जिन्होने अपने बच्चों को ऐसे संस्कार दिये कि वो बच्चे बड़े होकर राष्टृ भक्त, प्रभु भक्त, योद्धा, समाज सुधारक इत्यादि बनकर सामने आये और ऐसी भी नारियां हुई जिन्होने हमें त्याग, बलिदान का पाठ पढ़ाया। जैसे माँ सीता, मीरा, गार्गी, मैत्रेयी।
      कार्यक्रम को आगे बढ़ाते हुए साध्वी राजविंदर भारती जी ने कहा परन्तु प्रश्र ये है कि नारी सदैव ही महान रही है। किन्तु आज किस कारण से वह  अपनी गरीमा को खो रही है। मैडिकल सांईस की की एक युक्ति है *अडॉप्टिव इम्युनिटी* जो हमें बाहर की बिमारियों से बचाता है। परन्तु जब ये तंत्र कमजोर हो जाये तो इंसान रोग ग्रस्त हो जाता है। यह विज्ञान नारी वर्ग पर भी सटीक बैठता है। नारी का चरित्र इसकी सुरक्षा ढाल हुआ करता था। चरित्र के गरिमाशाली गुण जैसे आत्मविश्वास, आत्मशक्ति, सादगी, सरलता, त्याग, सहिष्णुता आदि मिलकर एक बेजोड़ रक्षा तंत्र बनाते हैं। जो भीषण से भीषण आक्रमणों से बचाता है। पर आज हमारे समाज में नारी का यह सुरक्षा तंत्र कमजोर पढ़ता जा रहा है। आज हमारे समाज की नारीयों को ऐसे ही चारित्रिक गठन की जरूरत है जो सतयुग में दमयंती के पास था। जिससे दुष्ट व्याध को अपने प्रचंड तेज से भस्म कर दिया था। ऐसा व्यक्तित्व आज की नारी में मात्र अध्यात्म के माध्यम से ही आ सकता है। कार्यक्रम में महिलायों के लिए कुछ ऐसी गेमस भी करवाई गई जिससे वे अपनी योग्यता को पहचान कर आगे बढ़ सकें।
कार्यक्रम के अंत में नारी शक्ति जागरण समिति चण्डीगढ की प्रधान श्रीमति अंजु अवस्थी जी ने उपस्थित सभी महिलाओं का धन्यवाद किया। सभी महिलाओं को साध्वी जी द्वारा बताये गये मार्ग पर चलने के लिये प्रोत्साहित भी किया।

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