दुकानदारों को लाइसेंस दिए जाने के प्रस्ताव के खिलाफ सरकार से की अपील

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संजीव शर्मा 

चंडीगढ़ 10 अक्टूबर 2019: एफआरएआइ पंजाब ने आज सूक्ष्म एवं लघु दुकानदारों द्वारा तंबाकू उत्पादों की बिक्री के लिए लाइसेंस लेने के प्रस्तावित सुझाव पर चिंता जताई है। एफआरएआई का मानना है कि इससे गरीब खुदरा दुकानदारों का गंभीर रूप से उत्पीडऩ होगा और उनके लिए कारोबार करने की लागत बेहद बढ़ जाएगी, जिससे उनकी आय कम होगी। देश के किसी भी अन्य राज्य में ऐसा कोई कानून नहीं है, तो पंजाब में इस तरह का दंडात्मक कानून क्यों होना चाहिए।
एफआरएआइ ने पंजाब के माननीय मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर से ऐसे 1.5 लाख से ज्यादा सूक्ष्म खुदरा दुकानदारों और उनके परिवारों के हितों की रक्षा की अपील की है, जो मुश्किल से अपने लिए कुछ पैसा कमाते हैं और खुद को किसी उत्पीडऩ से बचाते हैं। कारोबारी समुदाय ने हाल के दिनों में इस सरकार को अपना व्यापक जनसमथ्र्रन दिया है, तब फिर ऐसा कानून क्यों लाया जा रहा है, जिससे उनके हितों और उनकी आजीविका पर व्यापक दुष्प्रभाव पड़ेगा।

आज चंडीगढ़ प्रेस क्लब में एक संवाददाता सम्मेलन को संबोधित करते हुए, फेडरेशन ऑफ रिटेलर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया के सदस्य और रिटेलर्स एसोसिएशन मोहाली के अध्यक्ष श्री उपेंद्र चौरसिया ने कहा, पंजाब में तम्बाकू उत्पाद बेचने वाले खुदरा दुकानदार तम्बाकू उद्योग पर सख्त विनियमन के कारण पहले से ही बेहद वित्तीय दबाव का सामना कर रहे हैं। इसी के साथ इन कदमों से इन गरीब दुकानदारों के लिए व्यापार करने की लागत बढ़ जाएगी और इससे उनकी कमाई में 60-70 प्रतिशत की कमी आ जाएगी, जो हमारे सदस्यों के लिए बड़ा झटका होगा।

एफआरएआई के सदस्य और प्रतिनिधि ने अपने हितों की रक्षा के लिए पंजाब में प्रदर्शन कर रहे हैं। सदस्यों ने अपनी मांगों की सूची सौंपते हुए सरकारी अधिकारियों के समक्ष अपना पक्ष भी रखा है। श्री उपेंद्र चौरसिया ने आगे कहा, ऐसे समय में जबकि देश में बेरोजगारी की दर अपने सर्वोच्च स्तर पर है और हमारे बच्चे और पारिवारिक सदस्य उचित रोजगार पाने में समर्थ नहीं हैं, ऐसे में कमाई को कम करते हुए उत्पीडऩ करने और व्यापार करने की लागत को बढ़ाने का कदम हमें बरबाद कर देगा। वैध उत्पादों की बिक्री पर पाबंदी लगाने का कदम भारत सरकार की कारोबारी सुगमता की नीति के विरुद्ध है। कोई भी कदम जिससे व्यापार की लागत बढ़ती हो, उसे तत्काल रोका जाना चाहिए।

किसी भी उत्पाद की बिक्री पर प्रतिबंध से उनकी आय में कमी आएगी और उनके लिए जीवन यापन मुश्किल हो जाएगा। यह स्थिति लोगों को अवैध गतिविधियों की ओर ले जाने का कारण बनेगी, जिससे समाज भ्रष्ट और विवेकहीन होगा, जो उन्हें ऐसे आपराधिक तत्वों से सौदा करने पर मजबूर करेगा, जो अवैध कारोबार संचालित करते हैं। आगे चलकर इससे कानून और व्यवस्था को लेकर बड़ी समस्या पैदा होगी।

फेडरेशन ऑफ रिटेलर एसोसिएशन ऑफ इंडिया (एफआरएआई) देशभर के चार करोड़ सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम दुकानदारों का प्रतिनिधि संगठन है और इसके सदस्य संगठनों के तौर पर उत्तर, दक्षिण, पूर्व एवं पश्चिम के कुल 34 रिटेल एसोसिएशन जुड़े हैं। हम देश के सबसे गरीब तबके के हितों की रक्षा के लिए कार्यरत हैं और उनके रोजगार के अवसरों पर प्रभाव डालने वाले मुद्दे उठाते हैं, साथ ही अपनी आवाज रखने में अक्षम वर्ग की आवाज को सरकार के समक्ष लाने में मदद करते हैं। हम सरकार की उन नीतियों की ओर ध्यान आकर्षित करते हैं, जिनसे असंगठित क्षेत्र में रोजगार की रक्षा हो और उन्हें प्रोत्साहन मिले, साथ ही देश में कारोबार करने का आसान माहौल बने।

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