ट्रिब्यून फ्लाईओवर योजना ही गलत, शहर की पहचान को बर्बाद कर देगा

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चंडीगढ़, 16 दिसंबर, 2019: आर्किटेक्ट्स ने आज इस बात पर जोर दिया कि चंडीगढ़ से संबंधित सभी फैसले या तो राजनेताओं या नौकरशाहों द्वारा किसी भी प्रा्रेफेशनल की भूमिका या नागरिकों की भागीदारी के बिना ही अपने स्तर पर मनमर्जी से ले लिए जाते हैं। यह शहर के लिए बहुत खतरनाक है और शहर को सुंदर बचाने के लिए इससे बचना चाहिए।
इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ आर्किटेक्ट्स, पंजाब चैप्टर द्वारा आज चंडीगढ़-पंजाब-हरियाणा आर्किटेक्ट्स की बैठक आयोजित की गई, जिसमें ये विचार उभर कर सामने आएं। इस बैठक में लगभग 50 आर्किटेक्ट्स ने ‘व्हाट एल्स ट्राइसिटी’ पर चर्चा में भाग लिया। इस अवसर पर अपनी बात रखते हुए आर्किटेक्ट सुरिंदर बाहगा ने कहा कि ‘‘ट्रिब्यून फ्लाईओवर का कॉन्सेप्ट जिस तरह से तैयार किया गया है, वह शहर की पहचान को बर्बाद कर देगा, जीएमसीएच में शोर का स्तर बढ़ाएगा, सेक्टर 32 में होने वाली ट्रैफिक की भीड़भाड़ एक के बाद एक अन्य सभी चौराहों तक फैल जाएगी और अंडरग्राउंड सर्विसेज में गड़बड़ी और पेड़ों आदि को काटना पड़ेगा। इस तरह के अस्थाई समाधान काम नहीं करेंगे। उन्होंने कहा कि शहर में यातायात से संबंधित मुद्दों के लिए एक समग्र समाधान खोजने की तत्काल आवश्यकता है।’’
डॉ.हरवीन भंडारी, डिप्टी डीन, चित्कारा स्कूल ऑफ प्लानिंग एंड आर्किटेक्चर ने ट्राइसिटी से संबंधित मुद्दों पर ध्यान देने की आवश्यकता पर प्रकाश डाला। प्रैक्टिसिंग आर्किटेक्ट पीपीएस आहलूवालिया ने मोहाली के बारे में बताया। आहलूवालिया ने एरोसिटी रोड के दोनों किनारों पर चल रहे कामों की आलोचना की। हर किलोमीटर के बाद ट्रैफिक लाइट यातायात के मुक्त प्रवाह में प्रमुख बाधा है। अतिक्रमण या धार्मिक स्थानों को समायोजित करने के लिए सड़कों को कई स्थानों पर गैर जरूरी बदलाव किए जाते हैं। मास्टर प्लान भविष्य नहीं है, भूमिगत जल के उच्चस्तर की समस्याएं, उद्योग पर कम ध्यान, प्रवास आदि कई अन्य चुनौतियां भी बनी हुई हैं।
प्रोफेसर दीपिका गांधी, निदेशक, ली कार्बूजिए सेंटर ने भी चंडीगढ़ के विभिन्न मुद्दों को उठाया। प्रो.गांधी ने चंडीगढ़ के बारे में अधिक से अधिक जानकारी का प्रसार करने, नागरिकों और शहर की विरासत के बारे में निर्णय लेने वालों के बारे में बात करने की आवश्यकता के बारे में बात की। उन्होंने विशेष रूप से शहर के विभिन्न पहलुओं में युवा पीढ़ी को शामिल करने के लिए और सामान्य रूप से शहरीकरण के मुद्दों पर अधिक सक्रिय कदम उठाए जाने की जरूरत पर भी जोर दिया। एस.एस. सेखों, पूर्व चीफ आर्किटेक्ट, पंजाब ने कहा कि 1966 से पहले के चंडीगढ़ की स्थिति को बहाल किया जाना चाहिए।
आर्किटेक्ट्स ने चंडीगढ़ के चीफ इंजीनियर के उस बयान की कड़ी निंदा की कि जिसमें उन्होंने कहा कि ली कार्बूजिए ने कंक्रीट का उपयोग करके एक बड़ी गलती की और चंडीगढ़ की बिल्डिंग्स को न्यूड छोड़ दिया। सभी ऐतिहासिक इमारतों का आर्किटेक्चर न्यूड हैं, या तो ब्रिक, स्टोन या कंक्रीट के आउटलुक में तैयार की गई हैं। मुकेश आनंद को लगता है कि इनकी मरम्मत करना मुश्किल है क्योंकि वह इसके लिए प्रशिक्षित नहीं हैं। इसका मतलब यह नहीं है कि कार्बूजिए गलती कर रहे थे। यदि कैपिटल कॉम्प्लेक्स के लिए कंक्रीट का उपयोग करना गलत था, तो चंडीगढ़ प्रशासन की प्रमुख परियोजनाएं अब भी एक ही मैटेरियल में क्यों बनाई जा रही हैं। उदाहरण के लिए, जीएमसीएच सेक्टर 32, सेक्टर 42 में हॉकी स्टेडियम और वर्तमान में न्यू यूटी सचिवालय का निर्माण भी उसी तरह से किया गया है।
ली कार्बूजिए ने राउंडअबाउट्स की चार चरणबद्ध विकास योजना दी, जो भीड़ से बचने के लिए तीन स्तरों पर यातायात की सुविधा प्रदान करती है। इस पर दोबारा से विचार किया जाना चाहिए और उस योजना को उसी आधार पर लागू किया जाना चाहिए। बड़ी बसों और मिनी बसों के फ्लीट से शहर के यातायात के मुद्दों को काफी हद तक हल किया जा सकता है। शहर के आसपास से गुजरने वाले पड़ोसी राज्यों के अवांछित ट्रैफिक को शहर के चारों ओर रिंग रोड होकर बाईपास किया जा सकता है।
रोज गार्डन और सेक्टर 17 के बीच गैर-जरूरी अंडरपास भी बिना इसके लाभ और नुक्सान पर विचार किए बिना बनाया गया है। शहर के बिजनेस हब की पहचान को सेक्टर 17 को नए रंगरूप में पेश करने के नाम पर बर्बाद किया जा रहा है। विभिन्न प्रशासनिक इमारतों को अपने स्वयं के बाय-लॉज के खिलाफ प्रस्तुत किया जाता है। बिना किसी अध्ययन या आंकड़ों के ली कार्बूजिए के कॉन्सेप्ट के खिलाफ मध्य मार्ग और कुछ अन्य सड़कों पर बदसूरत दिखने वाली रेलिंग लगाई जा रही है।
इस दौरान एकत्र हुए सभी आर्किटेक्ट्स ने चंडीगढ़ प्रशासन के सेक्टर 17 के ओवर-ब्रिज और सेक्टर 17 चंडीगढ़ में भूमिगत पार्किंग के निर्माण में चंडीगढ़ नगर निगम की भूमिका के निर्माण के निर्णय की खुलकर सराहना की।
आर्किटेक्ट्स ने चंडीगढ़ में सुखना चो और पटियाला की राव की नदियों के किनारे दो और लईर वैलीज को विकसित करने की सलाह दी। मौजूदा परिस्थितियों में, राजेंद्र पार्क से सुखना लेक तक कैपिटल कॉम्प्लेक्स की पूरी बेल्ट को प्रतिष्ठित लैंडस्केप आर्किटेक्ट के मार्गदर्शन में लैंडस्केपिंग की जरूरत है।
आर्किटेक्ट्स को लगता है कि चंडीगढ़ प्रशासन के पास अपने निवासियों के लिए कोई जवाबदेही नहीं है और वे सारी योजनाएं अपने स्तर पर हर बना लेते हैं। इसका एक कारण और भी है कि या तो उसके पास विधान सभा या मेयर इन काउंसिल नहीं है, जो कि होनी चाहिए। इस अवसर पर संबोधन करने वाले अन्य लोगों में हेम राज यादव, चीफ आर्किटेक्ट हुडा, ए.के. गुप्ता, उद्योगपति के साथ ही नीलम गुप्ता, संजीव गुप्ता और वी.के. झा भी प्रमुख तौर पर शामिल थे।

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