चंडीगढ़ में कृषि क़ानूनों खिलाफ यूटी के सैकड़ों कर्मचारियों ने खोला मोर्चा

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चंडीगढ़ 21 jan 2021अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के फैसले के तहत फेडरेशन आॅफ यूटी इम्पलाईज वर्कर्ज चंडीगढ़ के आह्वान पर यूटी व एमसी व अन्य विभागों के करीब दो दर्जन कर्मचारी संगठनों के हजारों कर्मचारियों द्वारा आज किसानों के समर्थन में तथा तीन कृषि क़ानूनों को रद्द करने तथा बिजली अमेंडमैंट बिल 2020 को निरस्त करने के लिए तथा सुचारु रूप से तथा मुनाफ़े में चल रहे चंडीगढ़ के बिजली विभाग के निजीकरण के खिलाफ बिजली दफ्तर सैक्टर 17 के सामने रोष रैली व प्रर्दशन किया गया। रोष रैली की अध्यक्षता फैड़रेषन के प्रधान रघबीर चंद ने की।

रैली में विशेष तौर पर आये अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के अध्यक्ष कामरेड सुभाष लांबा ने रैली को संबोधित करते हुए तीन कृषि क़ानूनों जिनमें कृषक उत्पादक व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सरलीकरण), मूल्य आश्वासन और कृषि सेवाओं पर किसान सशक्तिकरण एवं संरक्षण तथा आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक 2020को रद्द करने, न्यूनतम समर्थन मूल्य के लिए कानून बनाने, बिजली (अमैन्डमैंट)बिल 2020 को रद्द करने, एस.बी.डी. डाकूमेंट निरस्त करने तथा सुचारु रूप से तथा मुनाफ़े में चल रहे चंडीगढ़ के बिजली विभाग का निजीकरण रोकने की मांग की तथा सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए कहा कि देश के अन्नदाता पिछले 2 महीनों से राजधानी की सीमाओं पर कड़कती सर्दी में संघर्ष कर रहे हैं लेकिन सरकार बातचीत करके समस्याओं का समाधान करने में असफल रही है।

उन्होंने किसानों के संघर्ष के साथ एकजुटता का प्रगटावा किया तथा उनकी मांगों का समर्थन करते हुए कहा कि सरकार किसानों के लोकतांत्रिक अध्किारो को खत्म कर रही है तथा सरकारी तंत्र का गल्त इस्तेमाल करके किसानों की आवाज़ को दबाया जा रहा है। केन्द्र सरकार के गल्त फैसले के कारण देश का अन्नदाता सर्दी के मौसम में रात को भी सड़को पर पड़ा है। उन्होंने आगे कहा कि जब किसान इन क़ानूनों की मांग ही नहीं कर रहा है तो किसके दबाव में इन क़ानूनों को किसानों पर थोपा जा रहा है।

वक्ताओं ने आगे कहा कि केन्द्र और राज्य सरकारें जुल्म करके आंदोलन को दबाना चाहती हैं। सरकार खेती व किसानी को भी कार्पोरेट व पूँजीपतियों के हवाले करके फिरसे किसानों को गुलाम बनाना चाहती हैं। मंडी व्यवस्था व न्यूनतम समर्थन मूल्य समाप्त होने के बाद बिहार व दूसरे राज्यों के सरकार पंजाब व हरियाणा में खेतीहर मजदूरों के तौर पर काम करते हैं। ठेका प्रणाली लागू होने से किसान केवल कहने को ही खेत का मालिक रह जायेगा तथा फैसले कार्पोरेट ताकते करेगी। कानून के मुताबिक गतिरोध पैदा होने पर किसान अदालतों में भी नहीं जा सकता तथा अपनी मर्जी से फसल ना पैदा कर सकता है ना बेच सकता है।

अखिल भारतीय राज्य सरकारी कर्मचारी महासंघ के सचिव तथा फैड़रेषन के महासचिव गोपाल दत्त जोशी, प्रधान रघबीर चन्द, वरिष्ठ उप-प्रधान राजेन्द्र कटोच व उप-प्रधान ध्यान सिंह ने कहा कि आवश्यक वस्तु अध्निियम 1995 में संशोधन करके पूँजीपतियों को जमाखोरी की खुली छूट दी जा रही है। किसानों से सस्ते रेट पर उपज खरीद कर गोदामों में भर ली जायेगी व नकली मांग पैदा करके ऊँचे दामों पर  बेची जायेगी जिसका विपरीत असर आम जनता विशेष कर मजदूर वर्ग पर पड़ेगा। उन्होंने पराली जलाने पर एक करोड़ रूपये का जुर्माना  व कैद की सजा का भी विरोध किया गया तथा सरकार से मांग की गई कि संघर्ष कर रहे किसानों से शीघ्र बातचीत कर तीनों कृषि क़ानूनों को निरस्त किया जाए तथा बिजली अमैंडमैंट बिल 2020 को रद्द किया जाए व निजीकरण के दस्तावेज़ स्टैण्र्डड बीडिंग डाक्युमैंट को निरस्त किया जाए तथा सुचारु रूप से तथा मुनाफ़े में चल रहे चंडीगढ़ के बिजली विभाग के निजीकरण का फैसला रद्द किया जाए। उन्होंने निजीकरण के खिलाफ 3 फरवरी को की जा रही बिजली कर्मचारियों की हड़ताल को सफल करने की अपील की ताकि केन्द्र सरकार तथा चंडीगढ़ प्रशासन के जन विरोधी फैसले पर रोक लगाई जा सके।

रैली को श्री अमरीक सिंह, हरकेष चन्द, हरपाल सिंह, बिहारी लाल, बिषराम, राजेन्द्र कुमार के इलावा सीटू चण्डीगढ़ के प्रधान कुलदीप सिंह, पंजाब बोर्ड कार्पोरेषन के गुरदीप सिंह, फैड़रेषन के आगू भीमसैन, मनमोहन सिंह, चैन सिंह, एम.सुब्रमण्यम, सुखविन्द्र सिंह तथा किसान नेता बलबीर सिंह मुसाफिर ने भी संबोधित कर सरकार से किसानों की मांगों का तुरंत समाधान करने तथा बिजली विभाग का निजीकरण रद्द करने की मांग की।

रैली में विषेष प्रस्ताव पास कर वर्कचार्ज, डेलीवेज, कान्ट्रेक्ट,आऊटसोर्स समेत सभी सरकार के कच्चे कर्मचारियों को पक्का करने की मांग की गई तथा पक्का होने तक सभी कर्मचारियों को बराबर काम के लिए बराबर वेतन के सिद्धांत को लागू करने की मांग की।

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