चंडीगढ़ कमिश्नर ने दिखाई भाजपाइयों को उनकी औकात!

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लंच के दौरान पार्षद अनिल दुबे और कमिश्नर केके यादव में बहस 

संजीव शर्मा

चंडीगढ़ 30 OCT 2019। नगर निगम हाउस के दौरान कमिश्नर केके यादव ने बुधवार को सदन में भाजपा के मेयर से लेकर सभी पार्षदों को उनकी औकात दिखा दी। कमिश्नर यादव ने न सिर्फ हाउस को, बल्कि हाउस के चेयर मेयर राजेश कालिया सहित भाजपा के सभी पार्षदों की फजीहत करते हुए सदन की बैठक का बहिष्कार कर मौके से चले गए। हैरानी की बात है कि मेयर सहित भाजपा का एक भी पार्षद इतनी हिम्मत नहीं जुटा सका कि कमिश्नर के खिलाफ शिकायत लेकर प्रशासक बदनोर के पास जा पाते। जबकि भाजपा के कई पार्षद अपने आपको शहर में तोप से कम नहीं समझते हैं। चौंकाने वाली बात है कि फजीहत करने के बाद भी जब कमिश्नर ने लंच के लिए पार्षदों को बुलाया तो उनके साथ खाने के लिए तो कई दौड़ ही पड़े।

सदन का बहिष्कार कर जाते हुए कमिश्नर केके यादव जाते हुए

कमिश्नर को लेकर जबरदस्त गुस्सा
सदन का बहिष्कार करने पर पार्षदों में कमिश्नर केके यादव को लेकर जबरदस्त गुस्सा है। जिस प्रकार से कमिश्नर के आक्रामक कदम से मेयर और सदन की फजीहत हुई है। इसको लेकर भाजपा और कांग्रेस के कई पार्षद चाहते थे कि सबसे पहले मेयर कालिया इस घटना की अधिकारिक जानकारी प्रशासक वीपी सिंह बदनोर को दें, या फिर मेयर राजेश कालिया ऐलान करे कि जब तक कमिश्नर केके यादव हैं, तब तक उनकी एंट्री सदन में नहीं होने देंगे। भले सदन को स्पेशल कमिश्नर और अतिरिक्त आयुक्त के सहारे चलाना पड़े। इस प्रकार से भाजपा के पार्षद अपने ही मेयर की चुप्पी से परेशान हैं और अपनी हो रही फजीहत को लेकर भाजपाई पार्षद दुविधा में फंसे हुए हैं। यहां यह भी बताना जरूरी  है कि इस घमासान और फजीहत के बाद भी भाजपा के कई पार्षद कमिश्नर यादव के बचाव की कोशिश में रहे।

कमिश्नर केके यादव आक्रामक

हालांकि सदन में बैठक के दौरान कमिश्नर केके यादव आक्रामक दिख रहे थे। कमिश्नर की ओर से सवालों का जवाब देने के तरीके पर भाजपा पार्षद अनिल दुबे ने कमिश्नर को टोका। दुबे ने कहा कि जब सूद के सवालों के जवाब की जानकारी थी तो बिना देरी किए क्यों नहीं बता दिया। इस प्रकार से सदन के समय को बचाया जा सकता था। इसी प्रकार से शीला फूल सिंह जब समस्याओं को लेकर अधिकारियों के संपर्क में थी तो उनकों भी समय रहते हुए बताया जाना चाहिए था। इस प्रकार से एमसी अधिकारी पार्षदों को कोई जानकारी देना ही नहीं चाहते।

इस वीडियो को पूरी तरह देखें और सुनें किस प्रकार किया बहिष्कार

ये है घटनाक्रम 
भाजपा पार्षद अनिल दुबे ने कमिश्नर से यह सवाल कर दिया कि जब सप्ताह में अधिकारियों को वार्डाें में जाकर समस्याओं को सुलझाने की योजना बनाई गई थी। आखिर अब क्या हुआ जो अधिकारी क्षेत्र में जाते ही नहीं। इस प्रकार से बात बढ़ती चली गईअनिल दुबे के समर्थन में कांग्रेस सहित कई अन्य भाजपा पार्षद खड़े हो गए।
गर्मागरम बहस के दौरान अनिल दुबे ने कहा कि कमिश्नर साहब आप आईएएस की परीक्षा पास करके आ गए हैं। आपकी नौकरी चलती रहेगी। पार्षदों को तो हर पांच साल पर परीक्षाएं देनी पड़ती है। जनता के सवालों का जवाब उन्हें ही देना पड़ता है। इस पर कमिश्नर ने पलट कर जवाब देते हुए कहा कि जितनी भी फाइलें खोली जाती है, एक तरह से उन्हें भी उतनी ही परीक्षाएं देनी होती है। इस प्रकार से कमिश्नर यादव और पार्षद दुबे के बीच बात बढ़ती चली गई।

पार्षद को कमिश्नर बना

कमिश्नर केके यादव ने गुस्से में कहा कि प्रशासन से जाकर कहेंगे कि किसी एक पार्षद को कमिश्नर बना दें, वहीं एमसी को चलाएंगे। इसके बाद कमिश्नर यादव सदन से यह कहते हुए चले गए कि मेयर साहब सदन को मर्यादा में चलाना है तो ठीक है, अन्यथा मैं जा रहा हूं। इस प्रकार से कमिश्नर यादव वॉकआउट करते हुए सदन से चले गए। कमिश्नर का सदन  से वॉकआउट करते ही अन्य अधिकारी भी सदन से चले गए। हालांकि मेयर के साथ स्पेशल कमिश्नर संजय झा के अलावा अतिरिक्त आयुक्त सदन में मौजूद थे।

वीपी सिंह बदनोर से मिला जाए

इस घटना के बाद पार्षदों में जबरदस्त गुस्सा था। सभी पार्षदों ने काउंसलर के कमरे में आकर मीटिंग करने के बाद फैसला लिया कि प्रशासक वीपी सिंह बदनोर से मिला जा। हालांकि मेयर राजेश कालिया तैयार नहीं हुए। सदन से वॉकआउट करने के कुछ देर बाद कमिश्नर वापिस एमसी आए। इसके पहले समझा जा रहा था कि शायद कमिश्नर एडवाइजर से मिलकर वापिस पंजाब भेजने के बात करेंगे। हालांकि इसकी कोई पुष्टि नहीं हो पाई। एमसी आने के बाद कमिश्नर यादव ने पहले राजेश कालिया के कमरे में मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर से मिले।

अब लंच करने चलते

बाद में काउंलर के कमरे में कमिश्नर केके यादव पहुंचे और उन्होंने सभी से कहा अब लंच करने चलते हैं। कुछ तो साथ चले गए जबकि कुछ पार्षद कमिश्नर के खिलाफ मोर्चा खोलना चाहते थे, लेकिन मेयर का साथ नहीं मिलने से योजना धरी रह गई। लंच के बाद करीब तीन बजे हाउस की सदन में बैठक हुई। बैठक शुरू होते ही मेयर राजेश कालिया ने मामले को सुलझाने और रफा-दफा के बाद सदन को स्थगित कर दिया। अब बैठक 11 नवंबर 2019 को होगी।

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