चंडीगढ़ एमसी का बेड़ा गर्क, शहर की सड़कें बन गईं नर्क  

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सौजन्य आज समाज 
गड्ढों में गिरो या मरो नहीं बनती शहर की सड़कें!
एमसी में कंगाली सड़क ठीक कराने के पैसे ही नहीं 
सड़कों सही करने के लिए चाहिए 68 करोड़ 
प्रस्तुति राज सिंह 

चंडीगढ़ 18 सितम्बर 2019। शहर में अधिकतर सड़कों की हालत ऐसी हो गई है कि वाहन चालक कब और कहां गहरेगड्ढों में गिरकर गंभीर जख्मी हो जाए। इसका किसी को कुछ भी पता नहीं। इसके बावजूद निगम के आला अधिकारियों को इसकी कोई परवाह नहीं है। आला अधिकारियों को इतनी परवाह जरूर है कि किसी भी सूरत में उनकी सैलरी नहीं रूकनी चाहिए। चाहे बदतर हालत की सड़कों से किसी की जान ही क्यों न चली जाए। वहीं प्रशासन को भी इंतजार रहता है कि जब तक एमसी कटोरा लेकर उनके द्वार पर न पहुंचे, तब तक एक भी पैसे नहीं दिए जाएं।

शहर की सड़कें जानलेवा 

शहर की जानलेवा सड़कें 

सूत्रों की मानें तो एमसी में पूरी तरह से कंगाली छाई हुई है। इसके बाद भी आला अधिकारियों ने कामों की प्रायोरिटी तय नहीं की है। यदि प्रायोरिटी तय कर दी जाए तो सड़कों की हालत जानलेवा न हो। फिलहाल शहर की सड़कों पर खतरनाक हो चुके बड़े बड़े गड्ढों की भरमार हो गई है। कई सड़कों पर बजरियां निकलकर खरतनाक हो चुकी है। वहीं सूत्रोंने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि वर्ष 2017 में सड़कों के लिए काम अलॉट हुए थे। काम अलॉट होने के बाद भी वर्ष 2018 में एकाध को छोड़कर सड़कें नहीं बनीं। वर्ष 2019 में अबतक कोड आॅफ कंडक्ट के अलावा मानसून आ जाने से सड़कों ठीक कराने का काम नहीं हुआ। अब जब मानसून समाप्त होने पर है तो एमसी के पास पैसा नहीं है।

कहां गए 50 करोड़ 
वहीं अन्य सूत्रों का कहना है कि देवेश मोदगिल के मेयर रहते एमसी को सड़कों के मद में 50 करोड़ मिले थे। इस पैसे को सिर्फ सड़कों के लिए ही खर्च किया जाना था। इसके बाद भी इस पैसे को किस मद में खर्च किए, पुख्ता जानकारी नहीं है। इस पर सवाल किया जा रहा है कि जब वर्ष 2017 में अलॉट हुए काम वर्ष 2018 या इस साल में भी काम ही नहीं हुए, जो अधिकारियों की कार्यशैली पर सवाल खड़ा करता है।
कहां से आएंगे 68 करोड़ 
सूत्र बताते हैं कि फिलहाल शहर की सड़कों और पार्किंग को ठीक करने के लिए एमसी ने लगभग 68 करोड़ रुपए का बजट तैयार किया है। ताकि शहर में 425 किलोमीटर सड़कों दुरूस्त किया जाए। इसमें वो सड़कें भी शामिल हैं, जो वर्ष 2017, 2018 और इस वर्ष के काम अलॉटेड हैं। अब स्थिति यह है कि एमसी के पास सड़कों को ठीक कराने के लिए पैसे ही नहीं हैं। ऐसी स्थिति में एक ही रास्ता है कि एमसी को प्रशासक के पास हाथ फैलाने के लिए जाना होगा। तभी सड़कों संवारने का काम हो सकेगा।
कमिश्नर केके यादव

कमिश्नर बोले सैलरी के हैं पैसे

गत 16 सितंबर को एमसी हाउस की बैठक में पूर्व मेयर अरूण सूद ने जब कमिश्नर केके यादव से सड़कों की दुर्दशा पर चर्चा की तो इस पर कमिश्नर ने सूद को टका सा जवाब दिया कि एमसी के पास सड़कों लिए पैसे नहीं हैं। कमिश्नर ने यह भी साफ कर दिया कि एमसी के पास सिर्फ सैलरी देने के ही पैसे हैं। अब सड़कें बनानी हैं तो पैसा लाना होगा। अन्यथा शहर की सड़कें नहीं बन पाएंगी

एनआईटीटीआर को 36 लाख

सूत्रों ने हैरानी जताते हुए कहा कि एमसी एनआईटीटीआर को 36 लाख देने की तैयारी में है। यह अतिरिक्त बोझ शहर को पड़ने वाला है। वह भी तब जब एमसी में कंगाली छाई हुई है। इसके अलावा क्वालिटी चेकिंग की सारी व्यवस्था एमसी में मौजूद है। ध्यान रहे कि पूर्व डिप्टी मेयर सतीश कैंथ सवाल खड़ा कर चुके हैं कि जब एमसी सक्षम है और सारी व्यवस्था मौजूद है तो एनआईटीटीआर से एमओयू करने का क्या मतलब है।

पूर्व मेयर सूद बोले

पूर्व मेयर अरूण सूद
पूर्व मेयर अरूण सूद से जब इस संबंध में बात की तो उनका कहना है कि एमसी में अव्यवस्था फैली हुई है। बड़े अधिकारियों की ओर से कामों को लेकर प्राथमिकता तय नहीं है। यदि प्राथमिकता तय की जाती तो सड़कों की हालत बदतर नहीं होती। सूद के अनुसार उनके क्षेत्र में भी कई ऐसी सड़कें हैं जो वर्ष 2017 में काम अलॉट हुए हैं। इसके बाद भी काम नहीं हुए। 
मेयर राजेश कालिया

मेयर ने कहा 

मेयर राजेश कालिया ने कहा कि सड़कों को लेकर पैसे की कमी नहीं पड़ने देंगे। उन्होंने कहा कि प्रशासक वीपी सिंह बदनोर से समय लेकर सभी पार्षद उनसे मिलेंगे। उम्मीद है कि प्रशासक एमसी को निराश नहीं करेंगे। इस प्रकार से सड़कों के लिए 68 करोड़ की व्यवस्था की जाएगी। अब यह देखने वाली बात है कि शहर की सड़कों का कब कायाकल्प होता है।

एमसी को बंद किया जाना चाहिए

चेयरमेन आरके गर्ग
इस संबंध में जब समाज सेवी व सेकेंड इनिंग के चेयरमेन आरके गर्ग से बात की तो उनका कहना था कि एमसी को बंद करना कोई निदान नहीं है। एमसी को ईमानदारी से अपने रिसोर्सेज का दोहन करनी चाहिए। शहर के लोगों को जोड़कर एकजुट होकर एमसी को चलाने की जरूरत है। एमसी खुद के पैसे प्रशासन से नहीं ले पा रहे ओर गरीब बनकर बैठे हैं। बकाया सैकड़ों करोड़ों की रिकवरी तुरंत हो तो एमस की हालत सुधर जाएगी।

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