कोई माई का लाल अरूण सूद को प्रधान बनने से नहीं रोक सकता !

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फाइल फोटो 

चंडीगढ़ 7 जनवरी 2020। भाजपा से मेयर के लिए राजबाला मलिक को उम्मीदवार बनाने के बाद यह स्पष्ट हो गया कि कोई माई का लाल पार्षद व पूर्व मेयर अरूण सूद को पार्टी प्रधान बनने से नहीं रोक सकता। पिछले करीब दो माह से पार्टी के अंदर और बाहर चल रही चर्चा के अनुरूप ही राजबाला मलिक मेयर की उम्मीदवार बन गई है। जनवरी के पहले सप्ताह में ही राजबाला का नाम मेयर उम्मीदवार के रूप घोषित किया गया है, तो दूसरी तरफ चर्चा है कि जनवरी के तीसरे या चौथे सप्ताह में अरूण सूद की प्रधानी को लेकर ताजपोशी हो जाएगी। वहीं प्रधानी की दौड़ में बेहद तेज गति से दौड़ लगाने वाले दावेदार ठेस खाकर औंधे मुंह गिर जाएंगे, जिस तरह हीरा नेगी का हुआ । उनकी हालत ऐसी हो जाएगी कि जैसे उन्होंने कभी दौड़ ही न लगाई हो। इस बात को लेकर जबरदस्त चर्चा है कि मेयर पद के लिए भरे जा रहे नामांकन के दौरान अरूण सूद का बॉडी लेंगुएज भी देखने लायक था। उनमें एक अलग उत्साह देखने को मिल रहा था। वह भी तब, जब टंडन गुट का राजबाला से दूरी होते हुए भी अरूण बेहद खुश थे।

सूत्रों का कहना है कि पिछले करीब दो माह से पार्टी के अंदर और बाहर चर्चा चल रही थी कि किरण खेर गुट से राजबाला मलिक को मेयर बनाने को लेकर टंडन गुट से सहमति हो चुकी है। यदि इस चर्चा को मानें तो दोनों गुटों में सहमति के अनुसार ही राजबाला मलिक मेयर उम्मीदवार बनाई गई हैं। अब बारी है भाजपा प्रधानी की। खेर गुट भी वायदा निभाने के लिए टंडन गुट के अरूण सूद को प्रधान बनाने के लिए कमर कस चुके हैं। राजनीतिक पंडितों की मानें तो जिस प्रकार से मेयर उम्मीदवारी के लिए हीरा नेगी, सुनीता धवन को आई वॉश के लिए दौड़ में रखा गया था। उसी प्रकार से प्रधानी की दौड़ में सिर्फ और सिर्फ आई वॉश के लिए खेर गुट से सतिंदर सिंह व संजीव वशिष्ठ, टंडन गुट से चंद्रशेखर, राज किशोर व आशा जसवाल का नाम लिया जा रहा है। 

राजनीतिक पंडितों का कहना है कि हीरा नेगी को हमेशा ही भुलावे रखा जाता रहा। पहले मेयर उम्मीदवार बनाकर उनके साथ जो हुआ सभी को पता है। इसके बाद एफएंडसीसी चुनाव में भी उनके साथ बहुत अच्छा नहीं हुआ। इस बार यदि हीरा नेगी को मेयर उम्मीदवार बनाया जाता तो मेयर बनना निश्चित था, लेकिन यहां भी नेगी चूक गईं। इसके पहले नेगी को संघ सहित सभी कथित शुभचिंतकों ने साफ किया था कि इसबार एमसी हाउस में नेगी सरकार। जब नेगी के लिए उम्मीदवारी की बारी आई, तो यही हुआ कि इस बार भी नहीं नेगी की दरकार। इस प्रकार से मायूस, असहाय, निर्बल, असंतुष्ट और मन में 2024 में एमपी चुनाव लड़ने की मंशा लेकर 6 जनवरी 2020 को मेयर उम्मीदवार राजबाला का नामांकन भरवाकर चुपचाप अपने घरों को निकल गर्इं। इस दौरान किसी ने यह जानने की कोशिश नहीं की थी कि हीरा नेगी आखिर गई कहां, जबकि एमसी में सेक्रेटरी अनिल गर्ग के कमरे में कई भाजपाई काफी देर तक बैठे रहे

जानकारों के अनुसार ठीक इसी प्रकार से प्रधानी को लेकर कहीं पे निगाहें और कहीं पे निशाना चल रहा है। भले ही दुनिया को लग रहा हो कि सतिंदर सिंह, संजीव वशिष्ठ, चंद्रशेखर, राज किशोर, आशा जसवाल और भी किसी का नाम लिया जा रहा हो, लेकिन चंडीगढ़ भाजपा के प्रधान तो अरूण सूद ही बनने वाले हैं। रहीं बात पूर्वांचलियों को प्रधान बनाना, तो यह भी स्पष्ट है कि पूर्वांचल के नेता सिर्फ भीड़ जुटाने और दरी बिछाने के लिए ही होते है, न कि कोई पद पाने के लिए। यदि ऐसा नहीं होता तो भाजपा की प्रधानी में अनिल दुबे का भी नाम चलता होता। वहीं मेयर, सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर के चुनाव में तीनों पदों में से पप्पू शुक्ला की पत्नी चंद्रावती शुक्ला का भी नाम होता, पर ऐसा कुछ नहीं। भाजपा में अनिल दुबे, पप्पू शुक्ला जैसे नेताओं को सिर्फ भीड़ जुटाने के लिए, गाड़ी भरकर ले आओ जैसी मशीन ही माना गया।

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