चंडीगढ़ 22 फ़रवरी 2020, कौन कहता है कि सिर्फ सामान ही खरीदा और बेचा जाता है। पॉकेट में पर्याप्त धन हो तो वो सब कुछ भी खरीदा या बेचा जा सकता है, जिसके बारे में आप कभी सोच नहीं सकते। यहां तक कि अधिकारी, कर्मचारी भी खरीदे या बेचे जा

सकते हैं, बशर्ते कि जेब में धन और मार्केट में खरीददार मौजूद हो। इसका ही जीता जागता उदाहरण चंडीगढ़ शहर के सेक्टर-19 स्थिति सदर और पालिका बाजार है। हाईकोर्ट की सख्ती के बाद प्रशासन ने रजिस्टर्ड वेंडरों को शहर के विभिन्न सेक्टरों में शिफ्ट तो कर दिया, लेकिन यूटी के संबंधित विभिन्न विभागों के अधिकारियों और दुकानदारों की मिलीभगत से एक बार फिर अतिक्रमण माफिया ने पैर फैला दिया है। शहर के सदर बाजार और पालिका बाजार की इंच इंच जगहों पर फिर दुकानदारों और फड़ी वालों ने अपना कब्जा जमा लिया है।
शहर के विभिन्न सेक्टरों की मार्केटों में आदत से लाचार बेखौफ दुकानदारों ने एक बार फिर से हाईकोर्ट के आदेशों की धज्जियां
उड़ानी शुरू कर दी है। एमसी, एस्टेट ऑफिस के अलावा अन्य संबंधित विभागों की सांठगांठ से दुकानदारों की अतिक्रमण की दुकानदारी भी जमकर चल रही है। पहले की तरह ही दुकानदारों ने दुकानों की दीवारें, बरामदे, कोरीडोर, पार्किंग, फुटपाथ, शौचालयों के अलावा अन्य खाली की जगहों और पेंड़ों की डालियां टहनियों तक पर फिर से कब्जा जमा लिया है। इस प्रकार से हाईकोर्ट के आदेशों की सरेआम धज्जियां उड़ाई जा रही है। वहीं एमसी कमिश्नर, डीसी, एसएसपी जैसे नियम-कानून के रखवाले भी कुम्भकर्ण की निंद्रा में अचेत सोए पड़े हैं। चौंकाने वाली बात है कि एमसी इनफोर्समेंट डिपार्टमेंट के अधिकारी मार्केट में बैठे रहते हैं, इसके बाद भी यह सब लगातार चल रहा है। ध्यान रहे कि हाईकोर्ट ने गत वर्ष सख्त आदेश सुनाते हुए कहा था कि किसी भी सूरत में कॉरिडोर,फुटपाथ,पार्किंग या सरकारी जगहों पर अतिक्रमण न हो।
सूत्रों की मानें तो शहर से वेंडर्स शिफ्ट करने के बाद से सेक्टर-19 के सदर बाजार और पलिका बाजार में दुकानदारों ने सारी हदों को पार करते हुए एक फिर से इंच-इंच पर कब्जा कर लिया है। हालत यह है कि सदर बाजार में ग्राहकों के लिए चलना भी मुश्किल हो
गया है। स्थिति यह है कि मार्केटों की शौचालयों पर भी दुकानदारों और फड़ी वालों ने पूरी तरह से कब्जा कर लिया है। इस मार्केट में आने के बाद कहीं से भी ऐसा नहीं लगता है कि हाईकोर्ट के आदेशों को लेकर दुकानदार, कमिश्नर, डीसी या फिर एसएसपी जैसे अधिकारियों को इसकी कोई परवाह भी है। हैरानी की बात है कि जो दुकानदार वेंडर्स को लेकर हो-हल्ला मचाते थे। उन्होंने ही मिलीभगत करके पहले तो खुद ही बरामदों, पार्किंग की जगहो, दीवरों, शौचालयों, पेड़ों की टहनियों और डालियों पर कब्जा कर लिया। वहीं दुकानों के आगे बची हुई जगहों को फड़ी वालों को मोटे किराए पर कब्जा दिला दिया।
यहां बताना जरूरी है कि गत वर्ष हाईकोर्ट के सख्त फटकार के बाद कमिश्नर, डीसी, एसएसपी के अलावा अन्य अधिकारी सेक्टर-22 में अतिक्रमण हटवाने जाते थे। अब हालत है यह है कि इस तरह के बड़े अधिकारी अतिक्रमण से
पूरी तरह से अनभिज्ञ बने बैठे हैं। यदि सबकुछ ऐसा ही चलता रहा तो स्थानीय लोगों को शहर से अतिक्रमण हटाने के लिए एक बार फिर कोर्ट का दरवाजा खटखटाना पड़ेगा और सालों साल की लड़ाई लड़नी पड़ जाएगी। सूत्रों ने जांच की मांग करते हुए कहा कि इनफोर्समेंट की ओर से दुकानदारों और अवैध वेंडरों के खिलाफ कितने चालान और मामले दर्ज हुए हैं। जांच से पता चल जाएगा कि एक बार फिर से माफिया को पनपाने में किस किसका हाथ है। सूत्रों का दावा है कि सेक्टर-19 से हटाए गए सभी वेंडर्स को फिर दुकानदारों ने अंदर ही एडजस्ट कर दिया है। जगहों के रेट दोगुने कर दिए गए है। इस प्रकार से खुलेआम सामान भी चार से पांच गुणा अधिक कीमतों में बेची जा रही है।
सीनियर डिप्टी मेयर बोले
अतिक्रमण हटाने को लेकर सबसे अधिक मुखर रहने वाले सीनियर डिप्टी मेयर रविकांत शर्मा का कहना है कि पंजाब एंड हरियाणा हाईकोर्ट के आदेश के बाद भी शहर के दुकानदार और फड़ी वाले बाज नहीं आए। इनके खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए। सीनियर डिप्टी मेयर ने यह भी कहा कि इस माह एमसी हाउस की बैठक में मुद्दा उठाएंगे।
इनफोर्समेंट कमेटी के चेयरमैन बोले
इनफोर्समेंट कमेटी के चेयरमैन कंवर राणा का कहना है कि अतिक्रमण किसी भी सूरत में बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। उन्होंने कहा कि जल्द ही शहर भर की मार्केटों की हालत देखने के बाद कार्रवाई की जाएगी। राणा ने यह भी कहा कि इसकी जांच भी कराएंगे कि एमसी के कौन से ऐसे कर्मचारी और अधिकारी हैं, जिनका अतिक्रमणकारियों के साथ सांठगांठ है। उनके खिलाफ भी कार्रवाई करवाएंगे।
























