कुमार मधुकर
चंडीगढ़। कांग्रेस नेता हरमोहिंदर सिंह लकी ने अपनी चतुर रणनीति से पार्टी प्रधान बनने के बाद चंडीगढ़ कांग्रेस से अहंकार, घमंड, गुरूर जैसे जहरीले तत्वों को निकालकर पार्टी को मजबूत ट्रैक पर ला दिया। आज लकी का लोहा न सिर्फ पार्टी के अंदरूनी विरोधियों, बल्कि आम आदमी पार्टी और भाजपा वाले भी मान रहे हैं। कांग्रेस के लिए जब भी सिद्ध करना पड़ा, प्रमुख एचएस लकी ने पुख्ता तरीके से सिद्ध कर राष्ट्रीय नेतृत्व का दिल जीत लिया। यही कारण है कि लकी ने बदलते समय को पहचानते हुए आम आदमी पार्टी से गठबंधन का किनारा कर लिया। यहां यह बताना जरूरी है कि राजनीति में न तो कभी स्थायी दोस्ती होती है और न ही स्थायी दुश्मनी।
चतुर रणनीति से राजनीति का चमत्कार
राजनीति के जानकार कहते हैं कि लोकसभा चुनाव 2024 से पहले किसी ने नहीं सोचा था कि एचएस लकी प्रधान बनने के बाद अपनी चतुर रणनीति से राजनीति का चमत्कार दिखाएंगे। लकी ने अपनी रणनीति का पहला चमत्कार तब दिखाया जब पार्टी में बेहद मजबूत पूर्व केंद्रीय मंत्री पवन बंसल के रहते हुए खुद को पार्टी प्रमुख बनवा लिया। बाद में बंसल समर्थकों को पार्टी से बाहर का रास्ता भी दिखा दिया।
फायदा पवन बंसल को लेने नहीं दिया
दूसरा चमत्कार आम आदमी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन कराने में पवन बंसल की अहम भूमिका रही। लेकिन इसका फायदा पवन बंसल को लेने नहीं दिया गया। पार्टी सूत्र बताते हैं कि लकी की ही रणनीति थी कि बंसल को लोकसभा टिकट के लिए पार्टी दफ्तर में आवेदन करना पड़ा, जबकि पहले कभी बंसल ने ऐसा नहीं किया था। जबकि चंडीगढ़ से लोकसभा टिकट के लिए वर्तमान सांसद मनीष तिवारी ने कोई आवेदन नहीं किया था।
बंसल को छोड़कर…हम जिताकर लाएंगे
सूत्रों की मानें तो तीसरा चमत्कार यह था कि लोकसभा 2024 के टिकट के दावेदार खुद होते हुए भी लकी ने केंद्रीय नेतृत्व के सामने साफ कर दिया था कि पवन बंसल को छोड़कर कोई भी पार्टी उम्मीदवार हो, उसे हम जिताकर लाएंगे, चाहे वह मनीष तिवारी ही क्यों न हों। अंततः मनीष तिवारी कांग्रेस से उम्मीदवार बने और आम आदमी पार्टी के सहयोग से चंडीगढ़ लोकसभा सीट से जीत गए। यह जीत मनीष तिवारी से ज्यादा लकी की रणनीति की थी। इसी वर्ष यानी 2024 में लकी ने चौथा चमत्कार दिखाकर गठबंधन धर्म निभाते हुए आम आदमी पार्टी को पूरा सहयोग दिया और उनके मेयर उम्मीदवार कुलदीप टीटा को मेयर बनवाया।
अपनी इस रणनीति का भी लोहा मनवाया
वहीं भाजपा की ओर से जबरन बनाए गए मेयर को हटाकर टीटा को मेयर की कुर्सी पर बिठाकर अपनी रणनीति का लोहा मनवाया। यह अलग बात है कि AAP नेताओं ने भी उनका सहयोग दिया और लिया भी। वर्ष 2025 में भी कांग्रेस प्रमुख एचएस लकी ने ऐसी राजनीतिक चतुराई दिखाई कि AAP उम्मीदवार प्रेमलता पार्टी के भीतरघात से मेयर नहीं बन पाईं, लेकिन कांग्रेस ने सीनियर डिप्टी मेयर जसबीर बंटी और डिप्टी मेयर तरूणा मेहता को जिताकर चंडीगढ़ से दिल्ली तक को अहसास करा दिया कि पार्टी अध्यक्ष हो तो लकी जैसा।
भुलावे में न रहे कि उनकी बैसाखी पर कांग्रेस चल रही
इसके बाद पांचवां चमत्कार दिखाते हुए एचएस लकी ने यह भी साबित कर दिया कि कोई इस भुलावे में न रहे कि उनकी बैसाखी पर कांग्रेस चल रही है या चलेगी। लकी ने जैसे को तैसे का जवाब देते हुए AAP नेताओं की बोलती ही बंद कर दी और गठबंधन तोड़कर फैसला किया कि अब चंडीगढ़ में आम आदमी पार्टी और कांग्रेस में कोई गठबंधन नहीं रहेगा। अब कांग्रेस अपने दम पर न सिर्फ मेयर चुनाव, बल्कि नगर निगम चुनाव 2026 भी लड़ेगी। हालांकि 4 साल AAP संग गठबंधन चलाकर भी लकी ने अपनी ताकत साबित की।
कांग्रेस बिखर जाती, पार्षद बागी हो जाते संगठन तबाह
इस प्रकार कांग्रेस प्रमुख लकी ने वक्त-वक्त पर साहस दिखाया। यदि इस बार मेयर चुनाव में गठबंधन रह जाता तो कांग्रेस बिखर जाती, पार्षद बागी हो जाते और संगठन तबाह हो जाता। लकी का यह कदम पार्टी को एकजुट रखने वाला मास्टरस्ट्रोक साबित होगा। पिछले मेयर चुनाव (2025) में AAP उम्मीदवार प्रेमलता हारीं, लेकिन लकी ने सीनियर डिप्टी मेयर व डिप्टी मेयर जिताए। इस बार (2026) नामांकन के दिन गठबंधन तोड़कर मेयर, सीनियर डिप्टी व डिप्टी मेयर पर स्वतंत्र उम्मीदवार उतार दिए, चाहे परिणाम कुछ भी हो।
अपनी रणनीति से पार्टी को हर मोर्चे पर जिंदा रखा
























