फाॅस्वेक बैठक में किरण खेर की कड़ी आलोचना, बताएं मुकेश आनंद के बिना कौन सा प्रोजेक्ट रह जाएगा अधूरा!

0
1273
Pankaj Gupta

चंडीगढ 27 दिसंबर 2020। फाॅस्वेक की बैठक में रविवार को चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद को सेवा विस्तार देने यानि एक्टेंशन दिलाने के विषय पर गंभीरता से चर्चा की गई। बैठक के दौरान इस मसले पर शहर में मच रहे घमासान पर फाॅस्वेक के सदस्यों ने स्थानीय सांसद किरण खेर की कार्यशैली की कड़ी आलोचना की। इस पर फाॅस्वेक के मुख्य प्रवक्ता और सैक्टर 38 वैस्ट आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष पंकज गुप्ता ने सांसद किरण खेर पर कटाक्ष करते हुए कहा कि शहर, विभिन्न समस्याओं से जूझ रहा है। वहीं सांसद खेर इन चीजों से अनभिज्ञ होकर चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद को एक्टेंशन दिलाने के लिए पूरी तरह से जुटी हुईं हैं।

file photo
पंकज गुप्ता ने बैठक के दौरान सवाल उठाते हुए कहा कि आखिरकार सांसद खेर चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद को एक्सटेंशन दिलाने में इतनी रूचि क्यों दिखा रही हैं, शहर के लोग जानना चाहते है। उन्होंने यह भी कहा कि पूरे कोरोनाकाल में सांसद खेर शहर की जनता से दूर रहीं। गुप्ता ने कहा कि सांसद खेर ने शहर की जनता की उम्मीदों पर पूरी तरह से पानी फेर दिया है। सभी विकासात्मक कार्य अधर में लटके पड़े हैं। उन्होंने सलाह दी है कि सांसद महोदया, चीफ इंजीनियर मुकेश आनंद की रिटायरमेंट के बाद उनके कार्यकाल को बढ़ाने जैसे छोटे विषयों को छोड़कर चंडीगढ़ की समस्याओं के पर ध्यान दें।
फाॅस्वेक के चेयरमैन बलजिंदर सिंह बिट्टू ने कहा कि प्राइवेट कूड़ेवालों के रोज़गार खत्म करके नगर निगम द्वारा अपनी गाड़ियां खरीदकर घरों से कूड़ा उठाने का निर्णय सरासर गलत है। जब पुराना सिस्टम सुचारु रूप से काम कर रहा है तो उसे बदलने की क्या जरूरत है। यदि बात सिर्फ कुड़े के पृथक्करण की है तो इसके लिए लोगों को और रेड़ी में कूड़ा उठाने वालों को प्रशिक्षित किया जा सकता है। बिट्टू ने कहा कि यदि अब नगर निगम ने गाड़ियां खरीद ही ली हैं तो इन गाड़ियों को रेजिडेंट्स वेल्फेयर एसोसिएशनस के सुपुर्द कर देना चाहिए जो अपने हिसाब से इनका प्रयोग करें। फाॅस्वेक के संरक्षक आर.सी. नैयर के अनुसार नगर निगम को सोशल ऑडिट करवाना चाहिए जिससे उसकी आय-व्यय और प्राथमिकताओं के बारे में लोगों को पता चले। महासचिव जे.एस. गोगिया के अनुसार एक तरफ तो नगर निगम कहता है कि वह आर्थिक तंगी से जूझ रहा है और दूसरी तरफ जनता की गाढ़ी कमाई का करोड़ों रुपया बेफिजूल खर्च दिया गया।
 
फाॅस्वेक के मुख्य सलाहकार कमलजीत सिंह पंछी के अनुसार पानी की दरों में 3 गुना तक की गई बढ़ोतरी और उस पर 30% सीवर सैस लगाना पूरी तरह गलत व असंवैधानिक है। फाॅस्वेक के सचिव व सैक्टर 8 आर.डब्ल्यू.ए. के अध्यक्ष आर.एस. गिल ने प्रश्न उठाया की क्या चंडीगढ़ में लोगों को 24 घंटे ताजे पानी की सप्लाई देने की जरूरत है? इसके लिए नगर निगम कर्ज लेता है और उसकी वसूली लोगों से करता है।
सैक्टर 13 आरडब्ल्यूए के अध्यक्ष कर्नल गुरसेवक सिंह ने कहा कि विकसित देशों के मॉडल पर नगर निगम को हर घर से अपनी गाड़ियों में कूड़ा उठाने की बजाए हर गली में बड़े बिन रख देने चाहिएं जिसमें लोग कूड़ा डाल दें और वहां से नगर निगम की गाड़ियाँ कूड़ा लेकर चली जाएं। साथ ही उन्होंने कहा कि सैक्टर 13 की वार्डबंदी भी गलत तरीके से की गई है। सैक्टर 39 आर.डब्ल्यू.ए. के अध्यक्ष अमरदीप सिंह के अनुसार जब उनके सैक्टर के लोग पहले ही कूड़ेवाले को गीला और सूखा कचरा अलग-अलग करके दे रहे हैं तो ऐसे में नया सिस्टम लागू करके लोगों को क्यों परेशान किया जा रहा है।
सैक्टर 21 आर.डब्ल्यू.ए. के वरिष्ठ उप प्रधान ए.एस. भाटिया और महासचिव प्रदीप चोपड़ा ने कहा की कूड़ा उठाने के नए सिस्टम से लोगों को भारी परेशानी हो रही है। न तो गाड़ियों के आने का कोई समय है, न ही नगर निगम के कर्मचारी ऊपरी मंजिलों पर जाकर कचरा उठाकर लाते हैं और न ही सभी घरों से कूड़ा उठाया जा रहा है। सैक्टर 33 आर.डब्ल्यू.ए. के अध्यक्ष जेएस सरपाल और सैक्टर 22 आर.डब्ल्यू.ए. के अध्यक्ष राजेंद्र मोहन कश्यप ने कहा की प्राइवेट कुड़ेवालों को हटाकर नगर निगम चंडीगढ़ में अपना एकाधिकार बना लेगा और आने वाले वक्त में इसके लिए लोगों से बहुत बड़ी धनराशि एकत्रित करेगा। सैक्टर 37 आर.डब्ल्यू.ए. के अध्यक्ष जे.पी. यादव ने कहा कि नगर निगम इस कार्य में तभी सफल हो सकता है जब वह लोगों की सहूलियत को ध्यान में रखते हुए न्यूनतम मूल्यों पर कूड़ा उठाने का कार्य करे।
फाॅस्वेक के सलाहकार डॉ. केएस चौधरी के अनुसार डड्डू माजरा स्थित डंपिंग ग्राउंड से उठते प्रदूषण और बदबू ने आसपास के क्षेत्रों के लोगों का जीना दूभर किया हुआ है, जिस ओर प्रशासन और नगर निगम का कोई ध्यान नहीं है। सैक्टर 44 आर.डब्ल्यू.ए. के अध्यक्ष वी.के. निर्मल और सैक्टर 14 वैस्ट आर.डब्ल्यू.ए. के अध्यक्ष अवतार सिंह ने कहा की चंडीगढ़ हाउसिंग बोर्ड को दिल्ली पैटर्न पर लोगों द्वारा घरों में जरूरत के हिसाब से किए गए बदलावों को नियमित करने की मंजूरी देनी चाहिए।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here