Kumar Madhukar
Chandigarh/Panchkula हरियाणा पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी में हाल ही में दो महत्वपूर्ण नियुक्तियां हुई हैं। रिटायर्ड आईपीएस आरसी मिश्रा को अथॉरिटी का चेयरमैन बनाया गया है, जबकि रिटायर्ड आईएएस ललित सिवाच को सदस्य के रूप में नियुक्त किया गया है। इन नियुक्तियों में सरकार ने ‘संघ’ और ‘काम’ दोनों का ध्यान रखा है।
नियुक्तियों की विशेषताएं:
– आरसी मिश्रा: आरसी मिश्रा को चेयरमैन बनाया गया है, जो पहले डीजीपी बनने की रेस में शत्रुजीत कपूर से पिछड़ गए थे।
– ललित सिवाच: ललित सिवाच को सदस्य बनाया गया है, जिन्होंने किसान आंदोलन के दौरान सोनीपत के डीसी के रूप में अपनी सूझबूझ से सरकार के कई सफल कार्यक्रम आयोजित करवाए थे। उन्हें ‘संकटमोचक’ के रूप में जाना जाता है।
अथॉरिटी की शक्तियां:
– शिकायतों की सुनवाई: अथॉरिटी डीजी स्तर के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आने वाली शिकायतों पर सुनवाई कर सकती है।
– शिकायतों के प्रकार: अथॉरिटी में पुलिस के खिलाफ आने वाली शिकायतों में दुष्कर्म, पुलिस हिरासत में मृत्यु, गंभीर चोट, बिना कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में रखना, जबरदस्ती वसूली करना आदि शामिल हैं।
– स्वत: संज्ञान: अथॉरिटी मीडिया रिपोर्ट और अन्य संचार माध्यमों से आ रही रिपोर्ट के आधार पर भ्रष्ट पुलिस अधिकारियों के खिलाफ स्वत: संज्ञान ले सकती है.¹ ²
हरियाणा पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी को रिटायर्ड आईपीएस आरसी मिश्रा के रूप में नया चेयरमैन मिल गया है तो रिटायर्ड आईएएस ललित सिवाच के रूप में सदस्य मिला है। इन दोनों ही नियुक्तियों में सरकार ने ‘संघ’ व ‘काम’ दोनों का ध्यान रखा है। अब देखने वाली बात यह होगी कि सेवानिवृत्त आईपीएस-आईएएस की यह नवनियुक्त जोड़ी अथॉरिटी में किस तरह से शिकायतों की सुनवाई करती है।
मिश्रा प्रदेश के डीजीपी बनने में शत्रुजीत कपूर से पिछड़ गए थे। इन, ललित सिवाच का सोनीपत में डीसी रहना उनकी नियुक्ति में अहम रोल निभा गया। सिवाच को सोनीपत का डीसी उस समय तैनात किया गया था, जब किसान आंदोलन चल रहा था। सिंघु बॉर्डर पर पक्का मोर्चा लगा हुआ था और सरकार का कोई भी नेता सोनीपत आने से कतराने लगा था। राज्य सरकार उस समय को बेहद क्रिटिकल मान कर चल रही थी। लेकिन, सिवाच अपनी सूझबूझ से किसान आंदोलन के दौरान ही राज्य सरकार के कई सफल कार्यक्रम सोनीपत जिले में कराने में कामयाब हो गए।
सिवाच एक तरह से सोनीपत जिले के लोगों का प्रदेश सरकार के प्रति भरोसा बनाने में कामयाब रहे। इनके संकटमोचक बनने की चर्चाएं कितनी ही बार सरकार के बड़े नुमाइंदे जिलों के डीसी व अन्य सीनियर आईएएस की बैठक में भी करते रहे हैं। विदित रहे कि हरियाणा पुलिस कंप्लेंट अथॉरिटी का गठन सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर किया गया था। अथॉरिटी डीजी स्तर के पुलिस अधिकारियों के खिलाफ आने वाले शिकायतों पर भी सुनवाई कर सकती है। अथॉरिटी में पुलिस के खिलाफ आने वाली शिकायतों में दुष्कर्म या दुष्कर्म की कोशिश, पुलिस हिरासत में मृत्यु, गंभीर चोट, बिना कानूनी प्रक्रिया के हिरासत में रखना, जबरदस्ती वसूली करना, किसी की जायदाद को हड़पना, पुलिस कर्मचारी का संगठित अपराध में शामिल होना, दस साल या इससे ज्यादा सजा वाले अपराध में पुलिस द्वारा कार्रवाई न करना शामिल है।
























