चंडीगढ़ 17 फरवरी 2020। शहर की स्कूली शिक्षा में लगातार आ रही गिरावट से यह साबित होने लगा है कि संबंधित विभाग भी अब भगवान भरोसे ही है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि एक तरफ कक्षाओं में भेंड़ बकरियों की तरह बच्चे ठूंस कर बिठाये जाते हैं, दूसरी तरफ शहर में करोड़ों रुपए लगाकर बनाई गई स्कूलों की बिल्डिंगें कई साल पहले तैयार हो गई है, फिर भी खाली पड़ी है। इसके
बाद भी इंजीनियरिंग विंग, एजुकेशन डिपार्टमेंट या प्रशासन ने इन बिल्डिंगों को अब तक अपने हाथों नहीं लिया है। फिलहाल हालत यह है कि सेक्टर-12 की चार मंजिली स्कूल बिल्डिंग में लगाए गए करोड़ों के सामान चोरी हो चुकी है। गांव किशनगढ़ में स्कूल की चार मंजिली बिल्डिंग सालों पहले तैयार होने के बाद से विवाद चल रहा है। वहीं रायपुर कलां, मखन माजरा और मलोया में स्कूल की बड़ी -बड़ी इमारतें बनकर तैयार होने के बाद भी हैंड ओवर के इंतजार के बाट जोह रही है।
छात्र-छात्राओं की संख्या बढ़ती जा रही
लागत से कराया गया। इसमें गांव किशनगढ़ की चार मंजिली बिल्डिंग करीब सात करोड़ की लागत से बनाई गई है। इस बिल्डिंग में करीब 50 कमरे हैं। यह बिल्डिंग कई साल पहले जब बनकर तैयार हो गई, तब से स्कूल बिल्डिंग बनाने को लेकर जमीन मालिक और प्रशासन के बीच विवाद शुरू हो गया। इस विवाद के कारण जनता की गाढ़ी कमाई फंस गई है। स्थिति यह है कि यह स्कूल बिल्डिंग सांप, अवारा जानवरों और कबूतरों के लिए आरामगाह बन गई है। सामान उखाड़कर चोर ले गए
वहीं सूत्र बताते हैं कि सेक्टर-12 पीजीआई कैंपस में करीब 15 करोड़ की लागत से बनाई गई चार मंजिली बिल्डिंगें बनकर तैयार होने के
साथ ही चोरी हो गई। चोरी भी ऐसी हुई कि बिल्डिंग में लगाए गए एक एक सामान उखाड़कर चोर ले गए और प्रशासनिक अधिकारी देखते ही रह गए। इस बिल्डिंग की शुरू से हालत यह रही कि पिछले कई सालों से एजुकेशन डिपार्टमेंट को हैड ओवर करने का इंतजार था, लेकिन प्रशासन चुप बैठा रहा।
10-10 करोड़ से भी अधिक की लागत
सूत्रों का दावा है कि करीब 10-10 करोड़ से भी अधिक की लागत से रायपुर कलां और मखन माजरा में काफी लंबी चौंड़ी चार मंजिली इमारतें करीब साल भर पहले ही बनकर तैयार है। इसके बाद भी किसी को यह पता नहीं है कि उक्त दोनों ही बिल्डिंगे कब तक प्रशासन
अपने हाथ में लेगा। ध्यान रहे कि इन दोनों ही स्कूल भवनों में करीब 60-60 कमरे बने हुए हैं। इन स्कूलों को बनाने वाली कंपनी मैनेजर पवन कुमार का कहना है कि बिल्डिंग बनकर तैयार पर प्रशासन इन बिल्डिंगों को अपने हाथ में कब लेगा, कोई पता नहीं। मलोया में भी एक स्कूल बिल्डिंग को इंतजार है कि प्रशासन कब अपने हाथ में लेगा।
1.25 लाख बच्चें सरकारी स्कूलों में
पढ़ाई कर रहे हैं। हालांकि साल दर साल बच्चों की बढ़ती संख्या के कारण स्थिति खराब हो रही है। इसका अंदाजा इससे लगाया जा सकता है कि कई स्कूलों में एक-एक कक्षा में 60 से 70 बच्चों को बिठाकर पढ़ाया जा रहा है। ऐसी समस्याओं को लेकर काफी समय से अभिभावकों की ओर से आवाज भी उठाई जा रही है।स्कूलों में शिक्षकों की हालत
शहर के 115 सरकारी स्कूलों में कुल साढ़े सात हजार शिक्षक कार्यरत है। इसमें से 1200 शिक्षक अस्थायी है। वहीं करीब 550 के डेपुटेशन पर आकर पढ़ा रहे हैं। इसके बावजूद 150 के करीब शिक्षकों के अब भी पोस्ट खाली है, जिसे वि•ााग की ओर से भरना है।























