
संजीव शर्मा (ब्यूरो चीफ)
चंडीगढ़ 30 NOV 2020। वर्तमान मेयर का कार्यकाल समाप्त होने के साथ साथ अगला मेयर कौन होगा। इसको लेकर शहर में कयास लगना और लगाना शुरू हो गया है। कुल मिलाकर इतना निश्चित है कि शहर का अगला मेयर जो भी होए भाजपा से ही होगा। इस बीच भाजपा से उम्मीदवार कौन होगा इसको लेकर पार्टी के अंदर और बाहर बहस शुरू हो गई है। इस बार भाजपा में मेयर उम्मीदवार के पिछले सालों की तुलना में दावेदारों की संख्या अधिक होगीए जैसा कि दावा किया जा रहा है। यहां ध्यान रहे कि वर्तमान मेयर राज बाला मलिक का कार्यकाल जनवरी के पहले सप्ताह तक ही है। कुछ जानकार तो यहां तक बताते हैं कि अरूण सूद ही अगला मेयर होगा। यदि पूरी पार्टी में किसी में भी हिम्मत हो तो रोक कर दिखा दें। वहीं पार्षद महेश इंदर सिंह के बारे में कहा जा रहा है कि उनका हाल पार्टी के वरिष्ठ नेता सतिंदर सिंह जैसा होगा।
प्रदेश अध्यक्ष व पार्षद अरूण सूद सबसे प्रबल
राजनीतिक जानकारों की मानें तो इस बार भाजपा से मेयर उम्मीदवार के तौर पर पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष व पार्षद अरूण सूद सबसे प्रबल दावेदार हो सकते हैं। वर्ष 2021 के लिए जो भी पार्षद मेयर बनेंगे, उनके उपर बहुत बडी ज़िम्मेदारी होगी। क्योंकि आगामी एमसी चुनाव पर उनकी कार्यशैली का
बडा असर होने वाला है। ऐसे में अगला मेयर बनने वाले को पूरा साल बहुत ही सावधानी और फूंक फूंक कर कदम उठाना होगा। ताकि एमसी चुनाव में कोई प्रतिकूल असर न पडें। इस प्रकार से आगामी एमसी चुनाव को देखते हुए अरूण सूद मेयर बनते हैं, तो पार्टी प्रधान होने के नाते आपसी तालमेल बिठाकर एमसी चुनाव में पार्टी को मजबूत स्थिति में लाने में सहयोग मिल सकता है, ऐसा माना जाता है।
यदि प्रधान अरूण सूद ने कह दिया तो!
वहीं दूसरी तरफ यह भी कहा जा रहा है कि यदि प्रधान अरूण सूद ने कह दिया कि खुद ही मेयर बनेंगे, तो पार्टी में एक भी पार्षद में हिम्मत नहीं होगी कि सूद मेयर को उम्मीदवार बनने से रोक सके। क्योंकि करीब एक साल बाद एमसी का चुनाव होने वाला है। ऐसे में पार्षद उक्त हिम्मत शायद ही दिखा पाएं, क्योंकि वर्तमान पार्षदों को एमसी चुनाव के लिए टिकट भी चाहिए।
पूर्व मेयर देवेश मोदगिल का भी नाम
इसके बाद प्रबल दावेदार के तौर पर पूर्व मेयर देवेश मोदगिल का भी नाम लिया जा रहा है। हालांकि

पार्टी के ही कुछ लोगों का मानना है कि मोदगिल को उम्मीदवार बनाना कुछ असंभव सा लगता है। क्योंकि मोदगिल को मेयर उम्मीदवार बनाने से लेकर उनके मेयर कार्यकाल तक पार्टी के नेता खुश नहीं थे। हमेशा कोई न कोई विवाद चलता रहा था। इसलिए पार्टी सूत्र बताते हैं कि देवेश मोदगिल को अगला मेयर उम्मीदवार बनाया जा सकता हैए संशय वाली बात है।
महेश इंदर सिंह का लिया जा रहा नाम
वहीं तीसरा नाम महेश इंदर सिंह का लिया जा रहा है। सूत्रों का कहना है कि महेश इंदर सांसद किरण खेर की विश्वासी है। इसलिए अगला मेयर उम्मीदवार महेश इंदर को ही

बनाया जा सकता है। वहीं अन्य सूत्र बताते हैं कि महेश इंदर सिंह भले ही किरण खेर के विश्वास के पार्षद होए लेकिन उनका मेयर उम्मीदवार बनना संभव नहीं है। सूत्र के बाक़ायदा उदाहरण देते हुए कहा कि एमपी चुनाव के दौरान सतिंदर सिंह भी सांसद खेर की विश्वासी माने जाते थे। शहर में सभी मानते थे कि सतिंदर सिंह ही भाजपा का अगला प्रधान हो सकते हैं। पर इसके विपरीत अरूण सूद पार्टी के प्रधान बन गए। ठीक इसी प्रकार से महेश इंदर के साथ हो सकता है। अंततः महेश इंदर सिंह उम्मीदवारी की दौड से बाहर चले जाएंगे।
राजेश कुमार गुप्ता उर्फ बिट्टू
चौथा नाम राजेश कुमार गुप्ता उर्फ बिट्टू का भी लिया जा रहा है। क्योंकि बिट्टू लगातार तीन टर्म

पार्षद रह चुके हैं। यदि वरिष्ठता के आधार पर किसी को मेयर बनाया गया तो राजेश बिट्टू सबसे प्रबल उम्मीदवार हो सकते हैं। वहीं अग्रवाल सभा की ओर से लगातार मांगें उठ रही है कि किसी अग्रवाल समाज से ही मेयर बनाया जाए। हालांकि सूत्रों का यह भी दावा है कि बिट्टू अधिक से अधिक सीनियर डिप्टी मेयर के उम्मीदवार ही बनाए जा सकते हैंए क्योंकि उनके नाम की वकालत करने वाला कोई मजबूत आदमी नहीं है।
शक्ति प्रकाश देवशाली का भी नाम

पार्टी सूत्रों के अनुसार एक नाम शक्ति प्रकाश देवशाली का भी आ रहा है। पूर्व प्रधान संजय टंडन के करीबी भी माने जाते हैं। हालांकि आने वाला समय बताएगा कि अगला मेयर उम्मीदवार अरूण सूद होंगे यह कोई और।
























