पूर्व मेयरों व पूर्व अध्यक्षों की ताकत से तेजतर्रार vs ‘चुप्पी’ पार्षद की उम्मीदवारी को लेकर जंग!
कुमार मधुकर
चंडीगढ़, 28 दिसंबर 2025: शहर में मेयर चुनाव को लेकर सियासी हलचल चरम पर है। आज भाजपा प्रभारी अतुल गर्ग की महत्वपूर्ण मीटिंग कमलम में चल रही है। समाचार लिखे जाने तक यह जारी है या खत्म हो चुकी होगी। कई राजनीतिक पंडितों का मानना है कि हर जगह चर्चा का केंद्र बिंदु यह है कि क्या इस बार चंडीगढ़ को ‘कंपलीट डमी’ मेयर मिलेगा या मिलने वाला है?
शहर भर में जोरदार बहस छिड़ी है कि कुछ ताकतवर लोग जिसमें कई पूर्व मेयर और पूर्व अध्यक्ष शामिल हैं जो डमी मेयर बनवाना चाहते हैं, ताकि जो पुराने अधूरे प्रोजेक्ट्स को पूरा करा सके। इशारों-इशारों में यह साफ है कि ये प्रोजेक्ट्स किनके सपने हैं।
शहर की गलियों, चाय स्टॉल्स से लेकर पार्षदों के फोन तक—हर तरफ बस एक ही फुसफुसाहट है कि कुछ ‘मास्टरमाइंड्स’ नया मेयर सिर्फ नाम का रखना चाहते हैं, वो रबर स्टैंप बने, पुराने अधूरे प्रोजेक्ट्स को चुपके से पूरा करे—बिना सवाल, बिना शोर! इशारों में साफ झलकता है, ये प्रोजेक्ट्स किन ‘अधूरे इश्क’ के प्रतीक हैं। खबरें हैं कि पूर्व मेयर और पूर्व पार्टी अध्यक्ष इस ‘डमी फॉर्मूले’ को लागू करने के लिए पूरी ताकत झोंक रहे हैं। अब सवाल यह है कि क्या तेज-तर्रार, जोशीला पार्षद मेयर पद पर काबिज होगा? या फिर वो ‘मुंह लटकाए’, बिना हंसी-बोली या आंसुओं वाला चुपचाप पार्षद चंडीगढ़ का चेहरा बनेगा? स्थानीय पार्षदों और नेताओं के बीच तनाव बढ़ता जा रहा है।
बताना जरूरी है कि शहर की सियासी दुनिया में तूफान खड़ा हो गया है! मेयर चुनाव की जंग अब खुली साजिशों का अखाड़ा बन चुकी है। हवा में घुली हैं ऐसी खतरनाक अफवाहें जो रीढ़ की हड्डी कंपकंपा दें। क्या चंडीगढ़ को इस बार ‘परफेक्ट डमी’ मेयर थमा दिया जाएगा?
अब सवाल खडा होता है कि सियासत के मैदान में तहलका मचाने वाला मेयर उम्मीदवारी से लेकर मेयर तक के सफर वाला ताज पहनेगा? या फिर वो ‘मुंह लटकू भूत’ पार्षद, जिसके चेहरे पर न हंसी की चमक, न बोली की गूंज, न आंसुओं की नमी—बस उदास आंखें और सन्नाटे का राज—शहर का मुंह बनेगा?


























