चंडीगढ़ भाजपा की पीट रही भद से भूचाल! 300 करोड़ के टेबल एजेंडे पर भाजपा में बगावत के सुर? 14 पार्षद मेयर सौरभ जोशी के खिलाफ खोल सकते हैं मोर्चा!

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आज नगर निगम का चुनाव हो जाए तो भाजपा का शहर से खाता तक खुलना मुश्किल!

कुमार मधुकर

चंडीगढ़। नगर निगम हाउस की 31 जुलाई की बैठक में करीब ₹300 करोड़ के टेबल एजेंडे पास किए जाने का विवाद अब भाजपा के लिए लगातार राजनीतिक संकट का रूप लेता जा रहा है। विपक्ष पहले ही इस पूरे मामले को लेकर सवाल खड़े करने के साथ बवाल कर चुके हैं। फिलहाल भाजपा के भीतर से भी असंतोष की खबरों ने भाजपा की चिंता बढ़ा दी है। यहां तक कहा जा रहा है कि यदि आज नगर निगम का चुनाव हो जाए तो भाजपा का शहर से खाता तक खुलना मुश्किल हो सकता है। मेयर के उक्त कारनामें से शहर की भाजपा ही नहीं बल्कि केंद्रीय नेतृत्व भी सकते में है।

बता दें कि आम आदमी पार्टी और कांग्रेस जहां इन एजेंडों को लेकर धरना-प्रदर्शन कर चुके हैं, वहीं अब चर्चा है कि भाजपा के करीब 14 पार्षद भी इन एजेंडों के पास होने के तरीके से नाराज बताए जा रहे हैं। सूत्रों के मुताबिक, इन पार्षदों का मानना है कि जिस तरह से इतने बड़े वित्तीय मामलों को टेबल एजेंडे के माध्यम से मंजूरी दी गई, उससे पार्टी यानी भाजपा की छवि को भारी नुकसान पहुंचा है।

अब भाजपा के सामने सबसे बड़ा सवाल—एजेंडे रद्द होंगे या नहीं?
विवाद बढ़ने के बाद भाजपा के भीतर अब डैमेज कंट्रोल को लेकर मंथन चलने की बात सामने आ रही है। पार्टी के सामने सबसे बड़ी चुनौती यही है कि पास किए गए विवादित एजेंडों को लेकर आगे क्या रास्ता अपनाया जाए। अगर इन एजेंडों को रद्द करने या दोबारा सदन में लाकर नियमानुसार चर्चा कराने का फैसला होता है, तो भाजपा इसे राजनीतिक नुकसान को कम करने की कोशिश के तौर पर देख सकती है। लेकिन अगर एजेंडे उसी स्थिति में बरकरार रहते हैं, तो पार्टी के भीतर असंतोष और ज्यादा बढ़ने की संभावना जताई जा रही है।

मेयर सौरभ जोशी के खिलाफ खुल सकता है मोर्चा?
सूत्रों के हवाले से यह भी चर्चा है कि भाजपा के करीब 14 पार्षद अपने ही मेयर सौरभ जोशी से नाराज बताए जा रहे हैं। अगर विवाद का समाधान जल्द नहीं निकला तो आने वाले दिनों में यही पार्षद मेयर के खिलाफ खुलकर मोर्चा खोल सकते हैं। हालांकि, इन दावों की आधिकारिक पुष्टि अभी नहीं हुई है, लेकिन भाजपा के अंदर जिस तरह की बेचैनी की चर्चा है, उसने नगर निगम की राजनीति को जरूर गरमा दिया है।

जेपी प्लांट, सेक्टर-34 और 227 करोड सहित 16 टेबल एजेंडा!
मेयर सौरभ जोशी के कार्यकाल में भाजपा के सामने एक के बाद एक कई ऐसे मुद्दे आए हैं, जिनको लेकर पार्टी को राजनीतिक नुकसान उठाना पड़ रहा है। जेपी प्लांट को हटाने का मामला, सेक्टर-34 मेला ग्राउंड की नीलामी और अब करीब ₹300 करोड़ के टेबल एजेंडे को लेकर पैदा हुआ विवाद भाजपा के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। इन मुद्दों को लेकर विपक्ष लगातार भाजपा और नगर निगम नेतृत्व पर हमलावर है। ऐसे में भाजपा के अपने पार्षदों के बीच असंतोष की खबरें पार्टी के लिए चिंता का विषय बन गई हैं।

केंद्रीय नेतृत्व से मेयर को कडी फटकार!
राजनीतिक गलियारों में यह भी चर्चा है कि पूरे विवाद को लेकर मेयर सौरभ जोशी को केंद्रीय नेतृत्व की ओर से कड़ी फटकार पड़ी है। हालांकि इस संबंध में भाजपा की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है।
अगर केंद्रीय नेतृत्व वास्तव में इस मामले में हस्तक्षेप करता है तो आने वाले दिनों में नगर निगम भाजपा की राजनीति में बड़े बदलाव देखने को मिल सकते हैं।

विपक्ष के बाद अब अपनों के सवाल
इस पूरे मामले में सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि अब सवाल केवल विपक्ष की ओर से नहीं उठ रहे, बल्कि भाजपा के अंदर भी कथित तौर पर असंतोष सामने आने लगा है। आम आदमी पार्टी और कांग्रेस पहले ही करीब ₹300 करोड़ के एजेंडों को लेकर भाजपा पर हमलावर हैं। अब यदि भाजपा के पार्षद भी इन एजेंडों को रद्द करने की मांग पर खुलकर सामने आते हैं, तो यह विवाद नगर निगम की राजनीति में नया मोड़ ले सकता है।

सबसे बड़ा सवाल अब यही है!
क्या भाजपा अपने ही मेयर के खिलाफ उठ रही नाराजगी को शांत कर पाएगी? क्या करीब ₹300 करोड़ के पास किए गए टेबल एजेंडों को रद्द किया जाएगा?

और सबसे महत्वपूर्ण
क्या 14 भाजपा पार्षद वाकई मेयर सौरभ जोशी के खिलाफ खुला मोर्चा खोलेंगे? इन सवालों के जवाब आने वाले दिनों में चंडीगढ़ नगर निगम की राजनीति की दिशा तय कर सकते हैं।

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