खेलो चंडीगढ़ से लेकर नगर निगम हाउस के ड्रामे तक… कैसे अपनों ने ही कांग्रेस को ‘हथियार’ देकर भाजपा अध्यक्ष की घेराबंदी की? जानिए अंदर की पूरी इनसाइड स्टोरी।
‘ब्लडी फूल’ से शुरू हुआ विवाद, एक महीने बाद अचानक क्यों जागा विपक्ष?
- मामला क्या था: करीब डेढ़ महीना पहले ‘खेलो चंडीगढ़’ के समापन और सम्मान समारोह में भाजपा अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा के मुंह से ‘ब्लडी फूल’ (Bloody Fool) शब्द निकल गया था। हालांकि, उनका इरादा किसी को ठेस पहुँचाने का नहीं था और उन्होंने इस पर तुरंत माफी भी मांग ली थी।
- अचानक उठा तूफान: इस बात के करीब एक महीने बाद अचानक पंजाब कांग्रेस इस मुद्दे को लेकर जागती है और बड़ा बवाल खड़ा कर देती है।
- अंदर की खबर: चर्चा है कि कांग्रेस खुद नहीं जागी, बल्कि भाजपा के ही अंदर बैठे ‘भस्मासुरों’ ने राष्ट्रीय अध्यक्ष के पंजाब दौरे को देखते हुए टाइमिंग सेट की और कांग्रेस को यह मुद्दा थाली में परोस कर दिया।
नगर निगम (MC) हाउस में ‘मूकदर्शक’ बने मेयर, कांग्रेस को मिला फ्री-हैंड!
- सुनियोजित हंगामा: पिछले दिनों हुई नगर निगम हाउस की बैठक में कांग्रेस पार्षदों ने इसी मुद्दे पर जमकर हंगामा किया और सदन की कार्यवाही को घंटों बाधित रखा।
- मेयर की भूमिका पर सवाल: जब भाजपा अध्यक्ष मल्होत्रा के खिलाफ सदन में नारेबाजी हो रही थी, तब मेयर सौरभ जोशी मूकदर्शक बने रहे। वो चाहते तो हंगामा शांत करा सकते थे, लेकिन उन्होंने पहले मौन साधा, फिर सदन स्थगित कर दिया।
- कुर्सी छोड़ बाहर गए मेयर: मेयर साहब दो बार सदन से बाहर चले गए और अपनी जगह सीनियर डिप्टी मेयर जस मनप्रीत सिंह को कुर्सी पर बिठा गए। बाद में जब वो लौटे, तो केवल अपने पहले के मौन को सही ठहराने (Justify) के लिए कुछ औपचारिकता निभाते दिखे।
सात समंदर पार से ऑनलाइन जुड़ा ‘मोहरा’ और मांग लिया इस्तीफा!
- नया ड्रामा: सदन में असली तमाशा तब हुआ जब सात समंदर पार बैठे एक भाजपा पार्षद कुलजीत संधू को ऑनलाइन सदन की कार्यवाही से जोड़ा गया।
- अपनों ने ही खोदा गड्ढा: ऑनलाइन जुड़ते ही भाजपा के ही इस पार्षद ने अपनी ही पार्टी के अध्यक्ष जतिंदर पाल मल्होत्रा से पद से इस्तीफे की मांग कर डाली।
- पार्टी की भद पिटी: जब कांग्रेसी पार्षद हंगामा कर रहे थे और भाजपा का मखौल उड़ा रहा था, तब भाजपा के अन्य पार्षद चुप्पी साधे बैठे रहे। जब तक कुछ पार्षदों ने बचाव शुरू किया, तब तक भाजपा की किरकिरी हो चुकी थी।
मल्होत्रा की बढ़ती लोकप्रियता से डरे ‘भावी सांसद और अध्यक्ष’ के दावेदार!
पार्टी के भीतर इस ‘भस्मासुरी राजनीति’ के पीछे की मुख्य वजह जतिंदर पाल मल्होत्रा की बढ़ती लोकप्रियता और जमीनी पकड़ है, जिसे कुछ बड़े नेता पचा नहीं पा रहे हैं। अंदरूनी सूत्रों के मुताबिक इस प्रपंच के पीछे वो चेहरे हैं:
- जो खुद को अगले लोकसभा चुनाव का टिकटार्थी मान रहे हैं (क्योंकि वो संजय टंडन को पहले ही रेस से बाहर मान चुके हैं)।
- जो खुद भाजपा का अगला अध्यक्ष बनने का सपना देख रहे हैं।
- ₹500 वाले चीफ गेस्ट: चर्चा है कि लोकसभा की उम्मीदवारी का सपना देखने वाले ये नेता शादियों से लेकर छोटे-छोटे कार्यक्रमों में मुख्य अतिथि बनने की मिन्नतें करते फिरते हैं, भले ही शगुन में 500 रुपये से ज्यादा न देते हों। मल्होत्रा का कद बढ़ने से इन ‘भावी नेताओं’ की सियासी जमीन खिसक रही है।
कांग्रेस पार्षद का बड़ा खुलासा: “मुद्दा भाजपा वाले देते हैं, हम तो बस भुनाते हैं”
जब इस पूरे घटनाक्रम पर कुछ कांग्रेसी पार्षदों से ऑफ-द-रिकॉर्ड बात की गई, तो उन्होंने बड़ा खुलासा किया:
- “हथियार भाजपा के ही लोग देते हैं”: कांग्रेसी पार्षदों ने साफ कहा कि भाजपा के अंदर क्या चल रहा है और किस मुद्दे पर अध्यक्ष को घेरना है, इसकी पूरी स्क्रिप्ट और जानकारी खुद भाजपा के ही अंदरूनी नेता कांग्रेस तक पहुँचाते हैं।
- रणनीति के तहत हुआ काम: कांग्रेसी नेता ने सवाल उठाया कि जब मल्होत्रा ने माफी मांग ली थी, तो एमसी हाउस में भाजपा पार्षद चुप क्यों थे? ऑनलाइन पार्षद को जोड़कर इस्तीफा मंगवाना क्या रोका नहीं जा सकता था? यह सब भाजपा का अंदरूनी प्रपंच है जिसका फायदा कांग्रेस उठा रही है। चंडीगढ़ भाजपा के लिए अब सबसे बड़ा टास्क यह पता लगाना है कि संगठन के भीतर ऐसे कितने ‘भस्मासुर’ हैं जो कांग्रेस के साथ ‘मैच फिक्सिंग’ कर रहे हैं। अगर इन पर लगाम नहीं कसी गई, तो आगामी चुनावों में विपक्ष से ज्यादा ये अंदरूनी भस्मासुर ही पार्टी को ले डूबेंगे।

























