संजीव शर्मा
चंडीगढ़ 14 नवंबर 2019 । नगर निगम हाउस में वीरवार को हुई बैठक में वे दो एजेंडे पर चर्चा तक नहीं हुई, जिस पर केंद्र सरकार ने प्रशासन की खिंचाई चुकी है। दोनों ही एजेंडे शहर के लाखों जनता से जुड़े थे। इसमें मुख्य तौर पर शहर को 24 घंटे पानी सप्लाई देने के लिए करीब 444 करोड़ रुपए ओर 550 करोड़ से तैयार होने वाले एसटीपी को लेकर कोई बात नहीं हुई। लागातार दो सदन की बैठकों को इसको लेकर हाउस में टालमटोल किया जा रहा। फिलहाल अगली मीटिंग में इससे संबंधित चर्चा होने की सं•ाावना है। हालांकि कुछ एजेंडे जरूर पास हुए। शहर के लोगों का मानना है कि एमसी हाउस में अधिकतर समय बेवजह की बातों में समय बर्बाद हो जाता है, जबकि अहम एजेंडे पर चर्चा तक नहीं होती है।
एमसी हाउस में रिस्ट्रक्चरिंग आॅफ स्टाफ एंड ब्रांचेज फंक्शनिंग संबंधित पॉलिसी को हाउस से हरी झंडी मिल गई। इसमें वर्ष 2012 की पॉलिसी बनाई गई थी। इसके बाद से शहर में कई तरह के बदलावा आए इसको ध्यान में रखते हुए रिस्ट्रक्चरिंग की पॉलिसी को झंडी दी गई है। एमसी में विभिन्न पदो के लिए करीब 125 स्टाफ की भर्ती की जानी है। रिस्ट्रक्चरिंग के बाद एमसी पर करीब 14 करोड़ रुपए सालाना का खर्च बढ़ेगा। रिस्ट्रक्चरिंग में ओएसडी का पोस्ट खत्म हो जाएगा। वहीं सीनियर डिप्टी मेयर और डिप्टी मेयर को भी मेयर की तरह ही कई स्टाफ मिलेंगे, जिसमें दो-दो पीअन का प्रावधान है। इस दौरान पार्षद रवि शर्मा ने मुद्दा उठाते हुए कहा कि एमसी में ऐसी व्यवस्था की जाए ताकि डेपुटेशन पर कर्मचारियों को न लाना पड़े। शर्मा ने जोर देकर पक्ष रखते हुए कहा कि एमसी कर्मचारियों को पदोन्नति देकर पदों का भरा जाना चाहिए।
आज करीब 75 ठेके के कर्मचारियों को नियमित करने संबंधित एजेंडा •ाी पास हो गया। इसमें पूर्व मेयर अरूण सूद ने झारखंड के अलावा अन्य राज्यों के हाईकोर्ट से आए स•ाी अन्य फैसलों को सदन में रखते हुए कहा कि एमसी में सीधे ठेके पर 10 साल से काम कर रहे स•ाी कर्मचारियों को वन टाइम रेगुलर किए जाएं। सूद ने ठेके पर काम कर रहे कर्मचारियों के बारे में कहा कि वर्ष 2004-06 से काम कर रहे हैं। इसके बाद •ाी नियमित किए गए हैं। इनके साथ न्याय होनी चाहिए। फिलहाल ठेके पर काम कर रहे स•ाी कर्मचारियों को छह माह के लिए एक्टेशन मिल गया है। अब यह देखना है कि प्रशासन इन कर्मचारियों को नियमित करने के लिए क्या फैसला लेता है।






















