
(ब्यूरो चीफ)
दिल्ली/मुंबई/चंडीगढ़। शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे के रंग बदलने से एक बार भाजपा के लिए राजनीतिक संकट गहरा गई थी, लेकिन शिवसेना को समर्थन देने में एनसीपी और कांग्रेस की ओर से हुई देरी ने अब खेल बिगाड़ दिया है। महाराष्टÑ में राष्टÑपति शासन लगने के बाद से फिलहाल भाजपा का पलरा भारी हो गया है। राष्टÑपति शासन के दौरान ही भाजपा बड़ा राजनीतिक खेल सकती है और शिवसेना का हासिये पर जा सकती है। वहीं दूसरी ओर कांग्रेस को भी इसका नुकसान हो सकता है। हालांकि शिवसेना का कहना है कि उन्हें सरकार बनाने के लिए कम समय दिया गया। उन्हें भी समझना होगा कि शह और मात में 24 घंटे का समय बहुत अधिक मिल गया था। सूत्रों का कहना है।
शिवसेना प्रमुख उद्धव ठाकरे ने कहा कि हमें सरकार बनाने के लिए समर्थन जुटाने के लिए काफी कम वक्त मिला है। समर्थन जुटाने के लिए महज 24 घंटे का वक्त बेहद कम है। जबकि राज्यपाल ने बीजेपी को समर्थन जुटाने के लिए ज्यादा वक्त दिया गया। उन्होंने कहा कि हमने कांग्रेस और एनसीपी से बातचीत की, लेकिन इतनी जल्दी में न्यूनतम साझा कार्यक्रम पर बातचीत नहीं हो पाई. उद्धव ने कहा कि राज्य में राष्ट्रपति शासन लगने से घबराने की जरूरत नहीं है. शिवसेना सरकार बनाने के लिए कांग्रेस और एनसीपी से बातचीत जारी है।
प्रेस कांफ्रेंस में उद्धव ठाकरे ने कहा कि लोकसभा चुनाव से पहले संभावना थी कि बीजेपी 200-220 सीटें आएंगी। ऐसे समय में बीजेपी के लोग हमसे मिलने आए थे। हमने अंधेरे में तीर चलाते हुए उनका साथ दिया था। अब जब उनकी स्थिति मजबूत हो गई है तो वे अपने वादे मुकर रहे हैं। उद्धव ने कहा कि हम सरकार बनाने की कोशिश में हैं। जब विपरीत विचारधारा के दल आपस में मिलते हैं तो उसमें समय लगता है। इसलिए हमें भी कांग्रेस और एनसीपी से बातचीत करने में वक्त लग रहा है। हमारे पास छह महीने का वक्त है।
उधर, एनसीपी प्रमुख शरद पवार के आवास पर कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ हुई बातचीत के बाद हुई संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में एनसीपी नेता प्रफुल्ल पटेल ने कहा कि महाराष्ट्र में सरकार बनाने के लिए शिवसेना ने पहली बार 11 नवंबर को एनसीपी और कांग्रेस से आधिकारिक रूप से संपर्क किया. इतनी जल्दबाजी में आम सहमति बनाना संभव नहीं था। सरकार गठन से पहले सभी दलों के बीच आम सहमति बनना जरूरी है.
वहीं संयुक्त प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद कांग्रेस के वरिष्ठ नेता अहमद पटेल ने कहा कि शिवसेना को समर्थन देने पर अभी फैसला नहीं लिया गया है. शिवसेना की तरफ से 11 नवंबर को सोनिया गांधी के पास समर्थन मांगने के लिए फोन आया था. इसपर उन्हें कहा गया था कि एनसीपी से बातचीत के बाद ही अंतिम फैसला लिया जाएगा. अहमद पटेल ने महाराष्ट्र में राष्ट्रपति शासन लगाने के फैसले को गलत बताया है।
पटेल ने कहा कि पिछले कुछ साल से लगातार सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस की अवहेलना हो रही है। उन्होंने कहा कि राज्यपाल ने बारी-बारी से बीजेपी, शिवसेना और एनसीपी को सरकार बनाने का मौका दिया, लेकिन कांग्रेस को पूछा नहीं गया, यह सरासर गलत है. राज्यपाल ने संविधान का मजाक उड़ाया है।
प्रेस कांफ्रेंस में मौजूद एनसीपी प्रमुख शरद पवार ने स्पष्ट किया कि फिलहाल बातचीत का दौर जारी रहेगा, अभी किसी अंतिम निर्णय पर नहीं पहुंचा जा सकता है। शिवसेना के साथ एक बार फिर से बातचीत की जाएगी जिसके बाद ही आगे का कदम उठाया जाएगा. उन्होंने कहा कि सरकार यूं नहीं बनती हैं, इससे पहले तीनों दलों के बीच सारी बातें साफ होनी जरूरी है।

























